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જૂનાગઢના ગિરનાર પર્વત પર સવારનો કુણો તડકો અને હવામાં એક અનોખી ઠંડક હતી. લીલી પરિ...
अदील की मंगनी की तैयारियां ज़ोरो शोरो पर थीं कौसर बेगम कभी देवरानी तो कभी नन्द क...
हाथ में थमी वह पुरानी, पीली पड़ चुकी चाबी काव्या को बेहद भारी महसूस हो रही थी। य...
अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ी थी।बाहर हल्की बारिश हो रही थी… लेकिन उसके अंदर...
विलक्षण ३सकाळी मी थोडा लवकर उठलो.पूजा आटोपून मीपुजारींना जिथे कागद सापडले होते त...
শনিবার,,,,,,,,,,,,,, 22/04/2019,,,,,, অন্ধকার রুমে একটা ধাড়ে বসে আছে একটা লোক।...
उन होठों पर खेलती उस मुस्कुराहट को देख अनायास ही वेदांश को अपना गला सूखता हुआ मह...
ਭਾਗ - 1: ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਸ਼ੁਰੂਆਤਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਲੱਖਾਂ ਲੋਕ ਆਉਂਦੇ ਨੇ ਤੇ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਨੇ। ਸਭ ਦੀ ਇ...
और ड्राइविंग सीट पर वही कालू ड्राइवर बैठा था, जिसका चेहरा अब आधा जला हुआ और खौफन...
ये पहली बार था जब एकांश का हाथ वर्शाली के किसी अंग को छु रहा था। दोनो ही एक दुसर...
कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए। श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और ब...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
ఇక్కడివరకూ నచ్చిందనే ఆశిస్తా. ఆ మర్నాడు తన పద్దెనిమిదో పుట్టినరోజు అనగా తన తల్లి మీద మర్డర్ అటెంప్ట్ చేసింది సారిక తనకేమాత్రం ఆ విషయమై స్పృహ లేకుండా. ఆ తరువాత కొన్నిరోజులకే తమ ఇ...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
प्रिय सोना तुझ्या सवयी बद्दल बोलायचे तर तुला सगळ्या चांगल्या आणि आदर्श सवयी होत्या कुठ खोड काढावी असे कधी तुझ्याकडून घडलेच नाही खरोखर "आदर्श माणूस" होतास तू मुख...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
जानेवारी २०२५जानेवारीचा महिना हवेत खुप गारवा होता. रात्रीचा एक वाजले होते.अमावस्या असल्याने सभोवताली काळोख होता.अश्या वेळी गोव्यावरून एक कार मुंबईच्या दिशेने हायवेवरून जात होती.का...
કરુણા લેખક : રવીન્દ્રનાથ ટાગોર અનુવાદ : રૂષિલ ડોડીયા
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