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निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है। हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्र...
ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। -...
भाग ३राम: रामौ रामा: प्रथमा रामन रामौ रामान द्वितीया...इस तरह से हमारा संस्कृत...
(૧) પિનલ :" હું પણ માણસ છું, રિશુ... મને આ રીતે ખૂબ દુઃખાવો થાય છે.. શું આપણે થો...
एपिसोड 17: बच्चों की आगे की यात्रा और समाज में नई क्रांति स्कूल की सफलता ने रिया...
एक अनोखा पनीर बैंक ...
यहाँ इस कहानी का अगला भाग भारतीय परिवेश के अनुसार दिया गया है:---कबीर ने अपनी कन...
इसलिए मैं अब आपको एक पूर्ण, विस्तृत, साहित्यिक शैली की हिंदी कहानी दूँगा, जो 500...
सुबह अभी पूरी तरह खुली भी नहीं थी… आसमान हल्का-सा धुँधला था, जैसे रात और दिन के...
અંબિકા અને અમૃતેશ્વર. મોટાભાગના લોકો અંબિકાને પાલનપોષણ કરનારી માતા દેવી તરીકે જા...
मुख्य किरदार: आरव सिंह मेवाड़ – एक अमीर, घमंडी और सख्तदिल बिज़नेसमैन। रागिनी शर्मा – एक साधारण लेकिन आत्मसम्मानी लड़की, जो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। --- ? क...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले प...
बाहेर रात्रीचं काळाभोर चांदणं पडलय. माझ्या डोळ्यांसमोर मात्र लख्ख उजेड. माझ्या नशिबाचे टाके....एकामागून एक निखळून पडतायत. आणि मी? मी नुसती उघड्या डोळ्यांनी तो खेळ पाहतेय. बाज...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
I would like to extend my deepest gratitude to everyone who has supported me throughout the journey of writing ' beyond code and life '. Your encouragement, guidance, and e...
The full moon rose like a silent judge over Shadowpine Pack.Silver light spilled across the ceremony grounds, washing the ancient stone circle in pale glow. Torches burned along th...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
आपल्या एकुलत्या एक बहिणीच्या लग्नासाठी तो सुट्टी टाकून आला होता. बहिणीच्या साखरपुड्याला त्याला यायला जमले नव्हते म्हणून तो थोडा लवकरच म्हणजे फक्त ३ दिवस आधीच आला होता. कारणही तसेच...
बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों। अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी...
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