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वर्शाली अपनी आंखें पोंछती हूई कहती है--- अब मैं क्या करू एकांश जी मुझे अपनी बहन...
सुभाष चंद्र बोस की पत्नी के बारे में और एक कहानी: वे भारत क्यों न आ सकींसुभाष चं...
EPISODE 6हवेली का विद्रोह और राजसी फ़रमान अभिमान का जुनून उसके अपने ही परिवार म...
एपिसोड 9: दानव की दहलीजशहर की हलचल माया के कानों में एक धुंधली गूँज की तरह बज रह...
आईने के पीछेपुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फु...
इतिहास के पन्नों से 18 अल...
आधा तू आधा मैं:- इसके बाद के दिनों में नेहा से व्यवहार में भी रोहित सहज होते गया...
सुबह की पहली किरण अभी खिड़की तक पहुँची भी नहीं थी—कि नीचे से चीख़ने–चिल्लाने की...
अध्याय १: चाणक्य का 'दफ्तर' और रडार जैसे कान मंगलाचरण: एक रहस्यमयी...
नहीं...नहीं, भईया जी .... मुझसे गलती हो गई ।ऐसा नहीं कहना चाहिए था मुझे ।मुझे मा...
बहुत बड़ी बिल्डिंग जिसके बाहर बहुत बड़ा बड़ा खुराना हॉस्पिटल लिखा हुआ था। हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर के बाहर कुछ आदमी आपस में बात कर रहे थे ,"तुम टेंशन मत लो जे डॉक्टर इंडिया के...
नोट- ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, इसका किसी भी तरह से जीवित या म्रत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य मात्र मनोरंजन है| =====&...
खिड़की गांँव के उस छोटे से पुलिस स्टेशन में एक खामोशी सी छा गई जब अमोल ने इंस्पेक्टर यादव पर चीखते हुए कहा,"मैं बारह घंटों से इस पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहा हूँ पर आप हैं कि...
यूँ तो अभी कृष्ण-पक्ष की समाप्ति में दो दिन बचे हुए थे और चंद्रमा अपनी बहुत ही हल्की छाया में तारों के साथ धीमी-धीमी रोशनी फैलाते हुए आसमान में चहलकदमी कर रहा था लेकिन फिर भी अपने...
शहर की नामी पॉश कॉलोनी में यूँ तो सुबह के आगमन की सूचना ब्रांडेड ट्रैक-सूट और महँगे जूते पहनकर कानों में इयरपॉड लगाए जॉगिंग पर जाते हुए स्वयं को भद्र दिखाने की कोशिश करते स्त्री-पु...
" एक 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या। क्या हो रहा है हमारे देश में? क्या ऐसे मुजरिम को सजा ए मौत देना चाहिए या नहीं? लेकिन आप यहां देख ही रहे हैं कि कुछ लोग इसे मु...
"मैंने शायद वास्तव में समय-यात्रा की है-" उत्कृष्ट रूप से सजी हुई गाड़ी के भीतर,अर्जुन सूर्यवंशी ने भावशून्यता से अपने सामने गोलाकार दर्पण को देखा। दर्पण में छवि स्पष...
वह पुलिस स्टेशन में बैठा, पुलिस की दीवारों पर महात्मा गांधी, भीम रॉव अम्बेडकर और गंगाधर तिलक की तस्वीरों को लगातार देखा जा रहा है। उसकी पलकें झपक ही नहीं रहीं है। उसके मुरझाए हुए च...
कुछ दोस्तों ने यह सोचा की हमे एक साथ अनिल के गांव में जाना चाहिए क्योकि अनिल से मिले हमे बहुत साल हो गए है, वह अपनी खेती की वजह से गांव में चला गया था उसके बाद उससे मिलना नहीं हुआ...
दरिंदें ( 1 )पूरा महानगर आज एकदम सुनसान है , वातावरण में एक अजीब सा डर मौजूद है , जिसके कारण सभी लोग अपने - अपने घरों में दुबक कर बैठे हैं ।शहर का एक बड़ा रिहायशी इलाका, जहाँ बहुत...
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