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आखिरी चिठ्ठी जो कभी भेजी हीं नहीं गई....? By jassu

“वो चिट्ठी… जिसने सब बदल दिया”
रात के करीब साढ़े दस बजे थे।
शहर की सड़कों पर हल्की बारिश हो रही थी। स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी पानी की बूंदों में टूटकर चमक रही थी, जैसे आसमान के...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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अलिफ लैला By Rajveer Kotadiya । रावण ।

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी??
फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी और बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रि...

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ध्वनि:अंतश्चेतना के बोध By Prashanth B

बैंगलोर, एक ऐसा शहर जो कभी पूरी तरह सोता नहीं है। दूर सड़क पर किसी ट्रक के चलने की आवाज़ और बीच-बीच में कुत्तों के भौंकने को छोड़ दें, तो उस मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा था।

अप...

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अधूरी धुन By Avinash

शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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काला गुलाब By Last leaf

लंबे बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आखें... एक अजीब सी खामोशी। शादी के एक फंक्शनम में राज ने उसे पहली बार देखा था। बस एक नजर... और उस नजर ने सब कुछ बदल दिया था। उसे नजर ने राज की पूरी दु...

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बिना देखे प्यार By mahadev ki diwani

मैं कोई पेशेवर लेखक तो नहीं लेकिन ऐसे ही थोड़ा लिखने का प्रयास कर रही हूं, इसमें जो भी गलती हो उसको कृपया कर बताएं टिप्पणी करके
कृपया अपना सुझाव भी दीजिए।
चलिए अब शुरू करते हैं...

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Maharana Pratap By Aarushi Singh Rajput

एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...

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एक दिन का Boyfriend By Shivraj Bhokare

मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी।
मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था।

आर्...

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आखिरी चिठ्ठी जो कभी भेजी हीं नहीं गई....? By jassu

“वो चिट्ठी… जिसने सब बदल दिया”
रात के करीब साढ़े दस बजे थे।
शहर की सड़कों पर हल्की बारिश हो रही थी। स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी पानी की बूंदों में टूटकर चमक रही थी, जैसे आसमान के...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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अलिफ लैला By Rajveer Kotadiya । रावण ।

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी??
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ध्वनि:अंतश्चेतना के बोध By Prashanth B

बैंगलोर, एक ऐसा शहर जो कभी पूरी तरह सोता नहीं है। दूर सड़क पर किसी ट्रक के चलने की आवाज़ और बीच-बीच में कुत्तों के भौंकने को छोड़ दें, तो उस मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा था।

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अधूरी धुन By Avinash

शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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काला गुलाब By Last leaf

लंबे बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आखें... एक अजीब सी खामोशी। शादी के एक फंक्शनम में राज ने उसे पहली बार देखा था। बस एक नजर... और उस नजर ने सब कुछ बदल दिया था। उसे नजर ने राज की पूरी दु...

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कृपया अपना सुझाव भी दीजिए।
चलिए अब शुरू करते हैं...

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Maharana Pratap By Aarushi Singh Rajput

एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...

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एक दिन का Boyfriend By Shivraj Bhokare

मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी।
मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था।

आर्...

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