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दोहा: ५कबीर माया पापिणी, हरि सूँ करे हराम।मुखि कस्तूरी महमही, कुबधि कुहाड़ा काम॥क...
भाग 10: परीक्षा चार, सच्चाई का बोझचौथे दिन की सुबह चंद्रनगर में एक अजीब सी नमी ल...
हम सपरिवार खेत पर काम कर रहे थे। मन के भीतर एक दबी हुई खुशी थी कि मैंने 'नवी...
ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्...
Present time....कबीर सोफे पर अकेले बैठा था। चेहरा ठंडा, आँखें गंभीर। पर हाथ… हाथ...
धड़ाम!जैसे ही वह बैंक के अंदर भागा, एक भारी आग बुझाने वाला सिलेंडर (Fire Extingui...
डाइनिंग टेबल पर हल्की रोशनी थी… लेकिन बातचीत का माहौल धीरे-धीरे गंभीर होता जा रह...
Title: दुश्मनी के दरमियान इश्कPart 15: खामोशियों के बीच साजिशकबीर और Myra के बीच...
"उस बंद कमरे में सन्नाटा इतना भारी था कि अयान के सीने में धड़कता हुआ गुस्सा साफ...
---किरण और मधुकर एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। वो अब इस रिश्ते में बहुत आगे ब...
“वो चिट्ठी… जिसने सब बदल दिया” रात के करीब साढ़े दस बजे थे। शहर की सड़कों पर हल्की बारिश हो रही थी। स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी पानी की बूंदों में टूटकर चमक रही थी, जैसे आसमान के...
सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...
शहरयार और शाहजमाँ की कहानी?? फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी और बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रि...
बैंगलोर, एक ऐसा शहर जो कभी पूरी तरह सोता नहीं है। दूर सड़क पर किसी ट्रक के चलने की आवाज़ और बीच-बीच में कुत्तों के भौंकने को छोड़ दें, तो उस मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा था। अप...
शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...
मौत का दस्तक बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...
लंबे बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आखें... एक अजीब सी खामोशी। शादी के एक फंक्शनम में राज ने उसे पहली बार देखा था। बस एक नजर... और उस नजर ने सब कुछ बदल दिया था। उसे नजर ने राज की पूरी दु...
मैं कोई पेशेवर लेखक तो नहीं लेकिन ऐसे ही थोड़ा लिखने का प्रयास कर रही हूं, इसमें जो भी गलती हो उसको कृपया कर बताएं टिप्पणी करके कृपया अपना सुझाव भी दीजिए। चलिए अब शुरू करते हैं...
एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...
मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी। मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था। आर्...
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