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कबीर कुछ बोलने ही वाला था। उसके होंठ खुले…शब्द जैसे बाहर आने को तैयार थे।तभी सृष...
भाग ६क्लास की छुट्टी हो गई थी। मैं और सुनी चलते हुए थोड़े ही आगे आए थे कि हमें स...
"पाठक का स्पर्श" — अर्थ का जन्मब्रह्मांड अब तीन शक्तियों के बीच संतुलित था—लेखक,...
ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …...
- : : प्रकरण 86 : : नीला भी उस की जिंदगी के...
Episode 1 – पहली मुलाकातशाम का समय था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हल्की-ह...
दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों क...
एपिसोड 7: ब्लैकवुड की आत्माहवेली का सामनाअयान ने हवेली का दरवाज़ा खोला और भीतर क...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 5: वो आदमी जो मरकर भी ज़िंदा थाफोन अब भी अन...
अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने माहिरा और दिया को चेकअप के लिए अंदर ले लिया। अयान...
पुरानी दिल्ली की गलियों में एक हवेली थी — *हवेली-ए-नूरजहाँ*। वक़्त की गर्द ने इसकी दीवारों को ज़रूर थका दिया था, लेकिन इसकी खिड़कियों से अब भी मुहब्बत झांकती थी। उसी हवेली में रहती...
एक ऐसी दुनिया में जो हमारी कल्पना से भी परे थी, तीन मुसाफिर एक महान सफर पर निकले। इनमें से दो थे हेडन और एलेक्स, जिनकी भुजाओं में तूफानों से लड़ने की ताकत थी, और एक थी व्रीना, एक न...
अटारी में धूल के कण हवा में तैर रहे थे, मानो समय के साथ उलझी कोई पुरानी कहानी बुन रहे हों। नाना जी का बंगला, जो कभी किताबों की सौंधी खुशबू, कविताओं की गूंज, और ज्ञान की चर्चाओं से...
दोस्तों इस प्रेम कहानी की शुरुआत होती हैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकल कर IIT रुड़की उत्तराखंड देवभूमि में पढ़ने गए एक साधारण लड़के से, जिसे नैनीताल से आई ठंडी हवा के झो...
"छाया की जिंदगी का एक ही सपना था—विशाल का प्यार। लेकिन जब उसका सपना बिखर जाता है, तो उसके साथ टूटती है उसकी मोहब्बत की दीवानगी। उसी पल उसमें जन्म लेता है आत्मसम्मान और नारी-शक्...
सुबह की किरणें कमरे में फैल चुकी थीं। लगभग 45-46 का चौबे, पहलवान जैसा गठीला शरीर लिए, आँगन में कसरत कर रहा था। उसकी भारी आवाज़ गूँजी— “नीचे आ जा और कसरत कर, वरना नाश्ता नहीं मिल...
वो अब तक शराब के चार बोतल ख़तम कर चुकी थी। एक आलीशान कमरा… जिसमें दीवारों कुछ महंगी पेंटिंग्स लगे थे । वो कोई आम पेंटिंग्स नहीं थे, हर जगह अलग अलग जानवरों के पेंटिंग्स थे , जैसे...
दिल्ली का सेंट मैरी कॉलेज। गर्मियों का पहला दिन। नए सेशन का पहला दिन हमेशा हलचल भरा होता है। हॉस्टल में नए चेहरे, कैंटीन में भीड़, और हर किसी में कॉलेज लाइफ़ का रोमांच। आर्यन भ...
अपेक्षाओं का होना किसी भी संबंधी में, संबंध के लिए बीमारी होती हैं, बगैर अपेक्षाओं के कोई हमारी जरूरतों को हमारा संबंधी संबंध में पूरा करें तो ही, क्योंकि वो ही अपेक्षाएं पूरी होती...
बीमार मन की स्मृतियाँ बीमार मन की खिड़कियों पर स्मृतियों की धूल जमी रहती है, कभी कोई हंसी की आहट उस धूल में उँगलियाँ फेर जाती है, और कभी कोई रोष, शांत कोनों में फफूँदी बनकर उ...
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