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  • मुक्ति की कामना

    ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह...

  • God Wishar - 2

    विक्रम और टीना, कबीर के इस बदले हुए अंदाज़ को देखकर दंग रह गए। उनकी यादों में कबी...

  • महाभारत की कहानी - भाग 227

    महाभारत की कहानी - भाग-२३१ अर्जुन के नाना देशों में युद्ध और बभ्रुवाहन, उलूपी और...

  • सस्सी–पुन्नू - 2

    सुबह की हल्की रोशनी धीरे-धीरे रेगिस्तान की ठंडी रेत पर फैल रही थी… रात की ठंड अब...

  • Forest of Demons - 1

    सुबह 7:30 बजे J. K. Commerce College                   कॉलेज बोहोत हरा भरा था। क...

  • विक्री - 5

    6 किलोमीटर। सीधी रेखा में। लेकिन 2087 के पुरानी दिल्ली में कोई चीज़ सीधी रेखा मे...

  • Beginning of My Love - 7

    प्रोफेसर शरद देशमुख यांच्या या भावूक कथेचा हिंदी अनुवाद खालीलप्रमाणे आहे. मी भाष...

  • श्रापित एक प्रेम कहानी - 78

    निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से स...

  • वो कौन थी? - 7

    Chapter 7 — धुंध की वापसीआर्यन ने उस जली हुई चाबी को अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर स...

  • कुएँ में पुरा आसमान

    _______________________________गाँव के पश्चिम छोर पर एक कुआँ था। वह पुराना, गोल...

स्त्री का श्राप By Vedant Kana

गाँव धनौरा अपनी शांति और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता था। हर साल वहाँ एक मेला लगता था, जिसमें दूर-दूर से लोग आते। लेकिन इस बार का मेला आख़िरी साबित हुआ लक्षिता के लिए।

ल...

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वीरा हमारी बहादुर मुखिया By Pooja Singh

"हैलो !इशिता"
"हाय!पायल "
"तेरी फाइटींग की ट्रेनिंग पूरी हो गयी"
"हां!"
"अब क्या करगी "
"मैं सोशल वर्क करूंगी मां की यही इच्छा थी&#...

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Rebirth ...! By Reshma Janwekar

      अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था |     रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...

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बेपनाह प्यार By Kridha Raguvanshi

प्यार, एक चार अक्षर से बनी शब्द। लेकिन ये छोटी सी शब्द समुद्र से ज्यादा गहराई और कभी न रुकने वाली लहरों की तरह है। इस विश्व में हर किसी को प्यार होता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं। अक...

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टीस - पहली बार देखा था उसे By Shayar KK Shrivastava

"कभी-कभी कुछ लोग ज़िंदगी में यूँ दाख़िल होते हैं जैसे हवा— वे नज़र तो नहीं आते, मगर महसूस होते हैं।"

कॉलेज का पहला दिन था। नई जगह, नए चेहरे, और पुराने ख़्याल जो मन में उथ...

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13वी मंज़िल का दरवाज़ा By Mano Ya Na Mano

"साहब, इस बिल्डिंग में बारह ही मंज़िलें हैं। तेरहवीं कभी बनी ही नहीं।"
वॉचमैन की आवाज़ में न जाने कैसा कंपन था जो विशाल को बेचैन कर गया।

सुबह की पहली किरण अभी ठीक से ज़...

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13 नंबर फ्लैट By Vijay

रात के 11:42 हो चुके थे। सोसाइटी की सारी लाइटें बुझ चुकी थीं। हवा में अजीब सी सर्दी थी, जो जून की गर्मी में भी अजनबी लग रही थी।

अर्जुन एक नया डिलीवरी बॉय था। आज उसे एक ऑर्डर मिल...

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फोकटिया By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

वो जो दोस्त था

राजीव की ज़िंदगी में कोई बड़ी बात नहीं थी। वह न कोई बड़ा बिज़नेसमैन था, न सेलिब्रिटी, और न ही किसी खास खानदान से ताल्लुक रखता था। लेकिन फिर भी, उसमें कुछ खास था—व...

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तु ही मेरी मोहब्बत By Arati

मुंबई शहर” सुबह के 7.00 बज रहे थे। “अराध्या” उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी। तभी उसकी नज़र बेड से लगे टेबल पर गई । जहां एक तस्वीर रखी हुई थी। उसने तस्वीर को हाथ मे लिया और कहने लगी “...

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काठगोदाम की गर्मियाँ By DHIRENDRA SINGH BISHT DHiR

मैग्गी प्वाइंट्स की शाम


म के कोई सात बजने वाले थे। जून का महीना था, लेकिन पहाड़ों में गर्मियाँ कुछ और ही होती हैं — न ज्यादा तेज़, न ज्यादा ठंडी — बस हल्की-हल्की हवा जो हर थका...

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"साहब, इस बिल्डिंग में बारह ही मंज़िलें हैं। तेरहवीं कभी बनी ही नहीं।"
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म के कोई सात बजने वाले थे। जून का महीना था, लेकिन पहाड़ों में गर्मियाँ कुछ और ही होती हैं — न ज्यादा तेज़, न ज्यादा ठंडी — बस हल्की-हल्की हवा जो हर थका...

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