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गुलमोहर के साये में स्थित वह खूबसूरत बंगला जो ‘गौतम शिखा कुटीर’ के नाम से मशहूर था और जो कभी रौनक से लबरेज़ हुआ करता था आज सन्नाटे की गिरफ़्त में है और उसके भीतरी दरवाज़े और काले स्टील ...Read More

“ठीक है, शेफ़ाली भी अगले महीने आ जाएगी तब तुम शायद होमसिक नहीं होगी सुलोचनाटेंशन में आ जाती हैं-तुम्हारे अकेलेपन को सोचकर ” दाई माँ ने नाश्ता मेज पर लगा दिया था- “पापा..... माँ की लाड़ली बिटिया हूँ न.....इसीलिए ...Read More

सुलोचना के चेहरे पर मुस्कुराहट देख वे परेशान हो उठे- “तुम मेरी बात कोतवज़्ज़ोनहीं दे रही हो ” “मैं सोच रही हूँ कि आख़िर है तो वो हमारी ही बेटी जब हमने अपनी शादी का फैसला खुदकिया तो वह ...Read More

“तुम्हारा बदन जैसे साँचे में ढला हो..... पत्थर कीशिला को तराशकर जैसे मूर्तिकार मूर्ति गढ़ता है ” वह रोमांचित हो उठी थी अपने इस रोमांच को वह चित्र मेंढालने लगी एकयुवती गुफ़ा के मुहाने पर ठिठकी खड़ी ...Read More

चाँगथाँग वैली में झील के ऊपर कुछ काली पूँछ वाले परिंदे उड़ रहे थे काली गर्दन वाले सारस भी थे लद्दाख़ में इन्हें समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसीलिए बौद्ध मठों की दीवारों पर इन्हें उकेरा ...Read More

“पोंपेदूसेंटर? यह क्या बला है?” “नील, बला नहीं यह बीसवीं शताब्दी का संग्रहालय है जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति जॉर्ज पोंपेदू ने बनवाया था इसलिए इसका नाम पोंपेदू सेंटर के रूप में फ़ेमस हुआ ” “चलिए मैम..... फिलहाल तो होटल आबाद ...Read More

दूर दूर तक फैले समुद्रतट पर चहलक़दमी करते हुए उसने शेफ़ाली से पूछा- “क्याआप फ्लोरेंस, वेनिस देखे बिना भारत लौट जाएँगी? फ्रांस और इटली की दूरियाँ पर्यटक महसूस नहीं करते इतने क़रीब हैं दोनों देश ” “आप चलेंगे?” शेफ़ली ने ...Read More

“ऐसा क्यों कह रहे हो नील?” दीपशिखा ने उसके होठों पर हथेली रख दी फिर उसके सीने में चेहरा छुपाते हुए वह लरज गई- “कलाकार ऐसे ही होते हैं नील, हम भी तो ऐसे ही हैं लम्बे समय ...Read More

जैसे ही गेट के सामने गाड़ी रुकी उसने गौतम को खड़े पाया- “अरे..... तुम अभी आये?” “नहीं..... फोन लगा-लगा कर थक गया तुम्हारे घर जाना मैंने उचित नहीं समझा तब से यहीं खड़ा हूँ ” जाने क्या हुआ..... किस ...Read More

शेफ़ाली और दीपशिखा अब रोज़ आयेंगी यह जानकर सैयदचचा की बाँछें खिल गई थीं वैसे भी वे दिन भर स्टूल पर बैठे-बैठे तम्बाखू फाँकते थे और ऊँघते थे अब रौनक रहेगी दो महीने देखते ही देखते बीत ...Read More

गौतम के कहने पर रघुवीर सहाय ने टेप रिकॉर्डर स्विच ऑफ़ करते हुए कहा- “इतना बेहतरीन इन्टरव्यू अभी तक तो किसी चित्रकार का लिया नहीं मैंने जबकि दीपशिखा जी हमारी किताब की अंतिम चित्रकार हैं ”