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"ओए रोशन, ट्यूबवेल का पानी बंद करा कि नहीं? स्कूल जाने से पहले बंद कर देना...
कहानी – नई शुरुआत कस्बे के पुराने मोहल्ले में एक मकान था—लाल ईंटों से बना, जिस...
36 ---- विवाह शानदार तरीके से सम्पन्न हो गया |एक अलग त...
वो उठती है अपने आँसू पोंछती है उसकी आँखों में अब पछतावा ही नहीं…दृढ़ता भी है --ज...
हिम्मत न हारकमल चोपड़ाचलते-चलते अगम नदी तक आ पहुँचा था। कुछ देर तक वह पानी के त...
महाभारत की कहानी - भाग-२२७ वैशम्पायन द्वारा वर्णित उतंक की कथा प्रस्तावना कृष्...
आगे...!कपूर हाउस,राशी का कमारा, अपने तकिए को गले लगाए राशि की आंखें बंद थी।...
ट्रेन से उतरते ही मेहरीश को वही शोर, वही भीड़, वही ज़िंदगी का प्रेशर महसूस हुआ।...
राधा का संगम - प्रकरण 6 दादू नें उसे कई नाम दिये थ...
भाग - 4 धीरे-धीरे आवाज़ें वापस आने लगीं पहले एक हल्की सीटी जैसी गूंज फिर टूटती ल...
बिस्तर पर चुपचाप लेटी हानिया को पता ही नहीं चला के कब उसकी आंख लगी बाहर होती जोरदार बारिश और बादल की गर्जन से उसकी आंख खुली और सीधे रूम की साईड वाली खिड़की पर नजर पड़ी जहां से बारि...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
मुख्य किरदार: आरव सिंह मेवाड़ – एक अमीर, घमंडी और सख्तदिल बिज़नेसमैन। रागिनी शर्मा – एक साधारण लेकिन आत्मसम्मानी लड़की, जो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। --- ? क...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले प...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों। अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी...
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