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ज़ेबा का मंसूबा बादल को पसंद आया और वह उसे अमली जामा पहनाने के लीये नीकल पड़े. त...
नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनि...
"आज मी तुला असं शेवटचं भेटायला आलीये. "तिचं हे वाक्य खरंतर माझ्या खूप अंगावर याय...
एक बार दो शैतान बच्चे जंगल के दोनों तरफ बाँध रहे थे, सबको बड़े अच्छे से प्रसाद दि...
[45]“कपिल महोदय, और कोई तर्क है क्या?” या इस बात को यहाँ सम्पन्न मानकर स्वीकार क...
અનોખી સફરપ્રકરણ-67દાદુ… દ્રાઇવરે આશ્વાશન આપતાં કહ્યું..” હું મઠ પર લઇ જાઉં છું.....
शहद की गुड़िया - प्रकरण 36 " सुहानी को दादू भूल नहीं पात...
तू नेहमी ऋण मुक्तेश्वर बाजारात भाजी आणायला जायचा कधी कधी मात्र आपण दोघे कपिलतीर्...
पन्नों से परे का प्रहारभाग एक: कागज की सरसराहट और अदृश्य उंगलियांअस्पताल के उस क...
45 -- ==== ये दुख भी कितने-कितने विभिन्न वस...
समर्पण उन सभी 'खोजी' मन को, जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। और उन साहसी पाठकों को, जो सिर्फ मीठी बातें सुनने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि सच सुनने का साहस रखते हैं।...
बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को झुलसा रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे। "माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ," उसने माथे क...
அந்த நாளை எப்படி துவங்குவது என்பது பிரேமுக்கு தெரியவில்லை. எப்போதும் போல இருந்து விட முடியவில்லை. வேலையில்லா நாட்கள் பெரும் சுமையாய் இருந்தன. படிப்பு முடிந்து 2 வருஷம் ஓடி விட்டது....
शहर की साफ और चौडी सडक पर कबीर मेहरा की नई' मेबैक' किसी काले चीते की तरह हवा से बातें कर रही थी. कबीर मेहरा—शहर का वो नाम जिससे बिजनेस के गलियारों में सन्नाटा पसर जाता था....
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
యంత్రం ఐదు గంటలు................వాతావరణం చాలా చల్లగా ఆహ్లాదకరంగా ఉంది.... రోడ్డు మీద వెళ్తున్న వెహికల్స్నడుచుకుంటూ ఇళ్ళకు చేరుతున్న జనం, అలసిపోయి ఆ చల్లటి గాలికి సేద తీరుతూరే...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
పల్లె పడచు - వెన్నెలమనసుఅదొక అందమైన కుగ్రామం. స్వచ్ఛమైన గాలి, మదిని పులకరింపజేసే వాతావరణం. అటు ఇటు ఊగుతూ నవ్వుతూ పలకరించే పచ్చని పొలాలు, ఎటు చూసినా ఆత్మీయంగా స్వాగతం పలుకుతున్నట్లు...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
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