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  • అంతం కాదు - 81

    అలా వెళ్లి ఇంట్లో పడుకొని ఉన్న భాష మెల్లగా కళ్ళు మూయగానే డోర్ తెరుచుకొని ఎక్కడ న...

  • सस्सी–पुन्नू - 2

    सुबह की हल्की रोशनी धीरे-धीरे रेगिस्तान की ठंडी रेत पर फैल रही थी… रात की ठंड अब...

  • King of Devas - 48

    Chapter 142 Dharma's Labyrinth Vishnu's smile froze abruptly. Asura... a...

  • Forest of Demons - 1

    सुबह 7:30 बजे J. K. Commerce College                   कॉलेज बोहोत हरा भरा था। क...

  • زندہ

    انتظار کر رہا ہے۔میرے نازک دل کو توڑ کر تم پوچھ رہے ہو میں کیسا ہوں؟ مجھے سڑک کے...

  • विक्री - 5

    6 किलोमीटर। सीधी रेखा में। लेकिन 2087 के पुरानी दिल्ली में कोई चीज़ सीधी रेखा मे...

  • Beginning of My Love - 7

    प्रोफेसर शरद देशमुख यांच्या या भावूक कथेचा हिंदी अनुवाद खालीलप्रमाणे आहे. मी भाष...

  • श्रापित एक प्रेम कहानी - 78

    निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से स...

  • वो कौन थी? - 7

    Chapter 7 — धुंध की वापसीआर्यन ने उस जली हुई चाबी को अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर स...

  • कुएँ में पुरा आसमान

    _______________________________गाँव के पश्चिम छोर पर एक कुआँ था। वह पुराना, गोल...

દક્ષિણ ભારત નો પ્રવાસ By Ankursinh Rajput

Day ૧બેંગ્લોરની સફર માટે આમ તો પરફેક્ટલિ રેડી જ હતા પણ એલાર્મ નું નોટ સો મધુર ધૂને મારા કાન ના કોષોની આત્માને થર્ડ ડિગ્રી ટોર્ચર કરી દીધું ને ઊભો થઈને તૈયાર થઈ ગયો, ઉબેર બુક કરીને...

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शोध साहित्यिकांच्या पाऊलखुणांचा By Balkrishna Rane

आपल्या कानावर पुढील गाणी सतत पडत असतात...' रे घना ये रे धना न्हाऊ घाल माझ्या मना ...' नाही कशी म्हणून तुला..म्हणते मी ....' कुणाच्या खांद्यावर कुणाचे ओझे....कुणाचे ओझ...

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కాశీ క్షేత్రాన్ని దర్శించుకుందాం By PRINCE PREMKUMAR

ట్రావెలర్ గారు ఎన్నో దేవాలయాల విశేషాలు మీతో పంచుకుంటానునా పర్యటనలో భాగంగా కాశీ క్షేత్రం బయలుదేరదామా...కాశీ క్షేత్రం ప్రతి హిందువు తన జీవితకాలంలో ఒక్కసారైనా దర్శించుకోవాలి అనుకునే అ...

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अकेली दुनिया By prashant raghav

एक लड़का था, जो हमेशा अपनी अपनी  कल्पनाओं मैं खोया रहता था। बो सोचता है कि काश ऐसी दुनियां होती जा सिर्फ बो अकेला होता। लेकिन उसे क्या पता था कि ये सच हो जाएगा। चारों तरफ डरावनी ख़...

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अंतरा. By Raj Phulware

विल्सन अब अपने रेगुलर जॉब से ऊब चुका था।
तीन घंटे काम, घर लौटना, खाना और फिर सो जाना — यही उसकी दिनचर्या थी।
उसे अपनी ज़िंदगी में कुछ नया, कुछ रोमांच चाहिए था।
एक दिन उसने अचानक...

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ચાલો ફરવા જઈએ By Tr. Mrs. Snehal Jani

ધારાવાહિક:- ચાલો, ફરવા જઈએ. સ્થળ:- માંગી-તુંગી તીર્થ ક્ષેત્ર મહારાષ્ટ્ર લેખિકા:- શ્રીમતી સ્નેહલ રાજન જાની આ જગ્યા ખૂબ જ જૂની છે જેમાં બે ઢોળાવ છે માંગી-તુંગી એ એકાંત પર્વતની બે ખીણ...

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संस्कृति का पथिक By Deepak Bundela Arymoulik

हर यात्रा केवल दूरी तय करने का नाम नहीं होती। कभी-कभी वह यात्रा मन, आत्मा और अनुभवों की होती है, जो हमें जीवन के भीतर गहराई से झांकने का अवसर देती है। मेरी यात्रा भोपाल से शुरू होक...

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सत्रह बरस की तन्हा कहानी By yafshu love

(बचपन की तन्हाई)

मैं आज आप सब के सामने अपनी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं जो भी गलती हो माफ कीजिएगा ।

मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था कुछ कारणो और मजबूरी के कारण मुझे मे...

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कलकत्ता यात्रा By नंदलाल मणि त्रिपाठी

भारत आर्याब्रत सनातनीय बाहुल्य भू भाग जिसके सामजिक भौगोलिक परिवर्तन के जाने कितने दुःखद सुखद इतिहास है भारत सोने कि चिड़िया और विश्व मानवता का आदर्श एवं मार्ग दर्शक रहा सनातनी समाज...

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लाल दरवाज़े की रहस्यमयी यात्रा By kajal Thakur

बचपन में आदित्य को हमेशा लगता था कि उसके पापा उससे दूर रहते हैं।ना कभी गोद में उठाया, ना कभी स्कूल छोड़ने आए, ना कभी उसके दोस्तों के सामने मुस्कराए।

बस एक ही बात कहते थे —"म...

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आपल्या कानावर पुढील गाणी सतत पडत असतात...' रे घना ये रे धना न्हाऊ घाल माझ्या मना ...' नाही कशी म्हणून तुला..म्हणते मी ....' कुणाच्या खांद्यावर कुणाचे ओझे....कुणाचे ओझ...

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अकेली दुनिया By prashant raghav

एक लड़का था, जो हमेशा अपनी अपनी  कल्पनाओं मैं खोया रहता था। बो सोचता है कि काश ऐसी दुनियां होती जा सिर्फ बो अकेला होता। लेकिन उसे क्या पता था कि ये सच हो जाएगा। चारों तरफ डरावनी ख़...

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हर यात्रा केवल दूरी तय करने का नाम नहीं होती। कभी-कभी वह यात्रा मन, आत्मा और अनुभवों की होती है, जो हमें जीवन के भीतर गहराई से झांकने का अवसर देती है। मेरी यात्रा भोपाल से शुरू होक...

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भारत आर्याब्रत सनातनीय बाहुल्य भू भाग जिसके सामजिक भौगोलिक परिवर्तन के जाने कितने दुःखद सुखद इतिहास है भारत सोने कि चिड़िया और विश्व मानवता का आदर्श एवं मार्ग दर्शक रहा सनातनी समाज...

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बचपन में आदित्य को हमेशा लगता था कि उसके पापा उससे दूर रहते हैं।ना कभी गोद में उठाया, ना कभी स्कूल छोड़ने आए, ना कभी उसके दोस्तों के सामने मुस्कराए।

बस एक ही बात कहते थे —"म...

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