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त्रिशा... By palvisha

यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था।

मेरे पिताज...

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परायें हुए अपने By Ravnika

दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों बच्चो के पास दो औरते बैठी बात...

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ભૂલ છે કે નહીં ? By Mir

દોસ્તો,આજે બસમાં જવાનું થયું. મારી બાજુમાં એક બહેન બેઠા હતાં. કંઈક ગંભીર વિચારમાં હોય એવું લાગ્યું. એમની આંખો પાણી ભરતી હતી અને એ દુનિયાથી છુપાવતાં હતા. હું હજુ એમને કંઈ પૂછું એ પહ...

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સંવેદનાનું સરનામું By Jaypandya Pandyajay

યજ્ઞેશ પોતાની ચેમ્બરમાં બેઠો હતો. ત્યાં જ ડોર ખોલીને એક સુંદરી અંદર પ્રવેશ કરે છે. તમે ચિંતા ન કરશો બધુ જ ઠીક થઈ જશે, આપણો સમય અત્યારે ખુબ જ ખરાબ છે તે હું જાણું છું પણ એક દિવસ આપ...

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पंछी का पिंजरा By Anil Kundal

हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...

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रंग माझा वेगळा By manasvi Manu

आज सकाळपासून घरात एकच गडबड चालली होती . आई , मोठी काकू आणि छोटी काकू तीघी मिळून स्वयंपाक घरात राबत होत्या . ती आपलं सगळं आवरून बाहेर आली तर घराचा नकाशा च बदललेला होता . तिने आई ला...

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आर्या... By suchitra gaikwad Sadawarte

आर्या ....आर्या ही मुलगी तिच्या आई वडिलांची एकुलती एक मुलगी ! आर्याच्या जन्माची कथा .... आई ही एक सुशिक्षित घरातील स्त्री होती . जी एक मेहनतीने शिक्षण घेऊन तिच्या पायावर उभी झाली...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા By Komal Lakhani

આજના યુગમાં શિક્ષણ અને કારકિર્દી એકબીજા સાથે અવિભાજ્ય રીતે જોડાયેલા છે. શિક્ષણ વ્યક્તિને જ્ઞાન, કૌશલ અને વિચારશક્તિ પ્રદાન કરે છે, જ્યારે કારકિર્દી તે જ્ઞાનને વ્યવહારિક રૂપમાં પરિવ...

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ममता ...एक अनुभूति... By kalpita

केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था—
किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चे...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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त्रिशा... By palvisha

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मेरे पिताज...

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परायें हुए अपने By Ravnika

दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों बच्चो के पास दो औरते बैठी बात...

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ભૂલ છે કે નહીં ? By Mir

દોસ્તો,આજે બસમાં જવાનું થયું. મારી બાજુમાં એક બહેન બેઠા હતાં. કંઈક ગંભીર વિચારમાં હોય એવું લાગ્યું. એમની આંખો પાણી ભરતી હતી અને એ દુનિયાથી છુપાવતાં હતા. હું હજુ એમને કંઈ પૂછું એ પહ...

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સંવેદનાનું સરનામું By Jaypandya Pandyajay

યજ્ઞેશ પોતાની ચેમ્બરમાં બેઠો હતો. ત્યાં જ ડોર ખોલીને એક સુંદરી અંદર પ્રવેશ કરે છે. તમે ચિંતા ન કરશો બધુ જ ઠીક થઈ જશે, આપણો સમય અત્યારે ખુબ જ ખરાબ છે તે હું જાણું છું પણ એક દિવસ આપ...

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हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...

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आज सकाळपासून घरात एकच गडबड चालली होती . आई , मोठी काकू आणि छोटी काकू तीघी मिळून स्वयंपाक घरात राबत होत्या . ती आपलं सगळं आवरून बाहेर आली तर घराचा नकाशा च बदललेला होता . तिने आई ला...

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आर्या... By suchitra gaikwad Sadawarte

आर्या ....आर्या ही मुलगी तिच्या आई वडिलांची एकुलती एक मुलगी ! आर्याच्या जन्माची कथा .... आई ही एक सुशिक्षित घरातील स्त्री होती . जी एक मेहनतीने शिक्षण घेऊन तिच्या पायावर उभी झाली...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા By Komal Lakhani

આજના યુગમાં શિક્ષણ અને કારકિર્દી એકબીજા સાથે અવિભાજ્ય રીતે જોડાયેલા છે. શિક્ષણ વ્યક્તિને જ્ઞાન, કૌશલ અને વિચારશક્તિ પ્રદાન કરે છે, જ્યારે કારકિર્દી તે જ્ઞાનને વ્યવહારિક રૂપમાં પરિવ...

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ममता ...एक अनुभूति... By kalpita

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सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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