Best Human Science stories in hindi read and download free PDF

इंसान और उसकी भावनाएं
by Arjuna Bunty
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इंसान और उसकी भावनाएं इंसान और उसकी भावनाएं इंसान अपनी भावनाओं को लिखकर बोलकर और इशारों से दूसरों के सामने प्रकट करता है मगर कभी-कभी इंसान की कुछ भावनाएं ...

आलेख - नेचर मांगे मोर स्पेस
by S Sinha
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   इस आलेख में यह दिखाने का प्रयास किया गया कि दुनिया में बढ़ती जनसँख्या की मांग को पूरा करने के लिए हम किस तरह प्रकृति का दोहन कर ...

कंजी आंखें
by Shubhra Varshney
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कंजी आंखें "विभु तुमने स्कूल बैग लगा लिया? तुम्हें और तान्या को आज मैं ऑफिस जाते पर स्कूल छोड़ दूंगी।" टीवी कैबिनेट से पर्स उठाती गरिमा ने बेटे विभु ...

मुर्गी
by rajendra shrivastava
  • 771

लघु-कथा--   मुर्गी                                                     ...

रस्साकशी
by Alka Pramod
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                       सुबह के नौ बज गए थे ,पर रामी का कहीं अता पता न था ‘आज लगता है फिर ...

साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
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साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी          साहित्य के मूल्यांकन के अनेक मानदण्ड रहे हैं। सौष्ठववादी मूल्यांकन में कृति की आन्तरिक संरचना ही उसके विमर्श का आधार है। इसके ...

आभास - 2
by Priya Saini
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वक़्त बीतने लगा तो हमनें सोचा कि जब तक स्वेता नहीं आती हम अपने डायलॉग की रिहर्सल करते हैं। हम हँसी मजाक करते हुए अपने डायलॉग की रिहर्सल करने ...

आभास - 1
by Priya Saini
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न जाने कितनी बार मुझे ये आभास होता है कि यह घटना पहले भी घटित हो चुकी है। जबकि ये संभव ही नहीं है कि कोई भी घटना या ...

बिटिया के नाम पाती... - 5 - एक पाती अपने पसंदीदा रेडियो कार्यक्रम के नाम
by Dr. Vandana Gupta
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मेरे प्रिय बिनाका गीतमालाढेर सारी प्यार भरी याद के साथ नमस्कार     आज बरसों बाद तुम्हारी याद आयी हो, ऐसा नहीं है। तुम्हारे जाने के बाद से मैंने तुम्हें ...

प्रणाम
by Ruchi Dixit
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  • 1.7k

 प्रणाम एक ऐसा शब्द है ,जो प्रेम और आस्था से  जुड़ा होने के कारण, आध्यात्म यह अपना विशेष महत्व रखता है| वैसे तो प्रणाम के कई अर्थ और गुण ...

बिटिया के नाम पाती... - 4 - एक पाती खुद के नाम
by Dr. Vandana Gupta
  • 602

प्रिय वन्दूआज ज़िन्दगी के सफर में चलते चलते उस पड़ाव पर पहुँच चुकी हूँ, जहाँ से अतीत और भविष्य एक साथ नज़र आता है। ज़िन्दगी के गलियारे में झाँकते ...

परवरिश
by Atul Kumar Sharma ” Kumar ”
  • 988

आज न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। चारों तरफ खुशी का माहौल था। लोग न्याय व्यवस्था की तारीफ कर रहे थे। हो भी क्यों ना, आखिर पहली बार ...

बिटिया के नाम पाती... - 3
by Dr. Vandana Gupta
  • 666

प्रिय पापा,स्नेह वंदनकहते हैं कि एक लड़की को खुद माँ बनने के बाद ही माँ की भावनाएं समझ में आती हैं और एक लड़का पिता बनने के बाद ही ...

बालश्रम
by Rajesh Kumar
  • 887

पूरे विश्व में बाल श्रम को रोकने के कड़े से कड़े कानून बनाये गए, बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल श्रम के खिलाफ जनजागरण किया बहुत अच्छे परिणाम भी ...

द चोजन वन
by Dipti Methe
  • 664

                               द चोज़न वन...!               क़रीब सालभर बाद मैं अपने ...

प्रतिबिंब
by Dipti Methe
  • 613

                                          अर्थ 2.0             2099 ...

मानवता की जीवित लाश
by Apurva Raghuvansh
  • 673

हाय रे मानव! जातिक्या हो गया है तुझकोतू तो ऐसा नहीं था,फिर तुझको क्या हो गया है।आओ देखें मिलकर हम इस बार कब तक जीवित रहती है यह लाश,सुनने में ...

अरेंज मैरिज
by Kumar Gourav
  • 735

" बधाई हो आप बाप बनने वाले हैं । " सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने उत्साह से पूछा "कब? " डॉक्टर मुस्कुराई " बस चार महीने और इंतजार ...

और वो चला गया
by Pallavi Saxena
  • 1.2k

एक और सितारा खो गया। अभी उम्र ही क्या थी उसकी अभी जीवन चलना शुरू ही हुआ था। अभी इतनी जल्दी कैसे हार मान सकता था वो...?  इतना भी ...

घर वापसी
by Narendra
  • 486

                                             घर-वापसी माँ कितनी देर बाद हम खाना खाएंगे, ...

इतना डर अच्छा नहीं।
by Rahul shrivastava
  • 684

? नमस्कार मैं राहुल श्रीवास्तव‌। आज मैं आपको एक कहानी सुनाने जा रहा हूं और उस कहानी के जरिए हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि आज कोरोनावायरस का ...

भारतीय गोरैया पक्षी
by Sadanand Paul
  • 1.4k

 भारतीय गोरैया पक्षी (Indian Sparrow Birds) : डॉ. सदानंद पॉल हे फुतकी गोरैया ! गोरैया पक्षी (Sparrow Birds) की एक युगल जोड़ी सप्ताह में एक दिन कहीं से उड़ ...

हरामी
by Kumar Gourav
  • 1k

हरामीसर्दी के मौसम में बस यात्रा में बदन सिकोड़े चुपचाप लघुशंका दबाए बैठा था । ड्राइवर ने ठेके पर दारू के लिए बस रोकी और मैं जल्दी से शंका ...

प्रवाह - छुआइन
by Yasho Vardhan Ojha
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                                 -:छुआइन:-"एगो रहे बुढ़िया, एगो ओकर बेटा अउर बेटा के मेहरारू। गांव के बहिरे ...

सोशल मीडिया प्रदूषण (सोशल साइटों से प्रभावित मानव जीवन)
by RAM NIVAS VERMA
  • 700

S.M. POLLUTION राइटर - राम निवास वर्मा विषय - सोशल मीडिया विचार, हिंदी आर्टिकल वातावरण में अचानक परिवर्तन होने से मनुष्य और जीव – जंतुओं का जीवन बहुत प्रभावित ...

लाश
by Devendra Prasad
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इस संसार में अगर को सत्य बात है तो वह है मृत्यु / एक न एक दिन सभी की मृत्यु आनी ही है चाहे कोई पशु हो पक्षी हो ...

अश्लीलता
by Rajesh Kumar
  • 2.7k

 सामाजिक तौर पर अश्लील शब्द नकारात्मकता का सूचक है  अश्लील शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जिस का चरित्र काम वृत्ति प्रधान हो वह भी सामाजिक माहौल ...

हाँ... नपुंसक हूँ मैं
by राजीव तनेजा
  • 1.4k

“हाँ...नपुंसक हूँ मैं”बचाओ...बचाओ...की आवाज़ सुन अचानक मैं नींद से हड़बड़ा कर उठ बैठा। देखा तो आस-पास कहीं कोई नहीं था। माथे पर उभर आई पसीने की बूँदें चुहचुहा कर ...

मानो न मानो
by Shobhana Shyam
  • 1.1k

हम पढ़े लिखे लोग हर चीज को विज्ञान और तर्क के तराजू  पर तोले बिना किसी बात पर  विश्वास नहीं करते | यही हाल सुगंधा का था , वह ...

मरना भी एक कला है
by Satish Sardana Kumar
  • 2.2k

 मरना भी एक कला है।भग्गू मरा तो पता चला।जैसे वह खामख्वाह जी रहा था वैसे ही एक दिन खामख्वाह मर गया।वरना मैंने इस तरह से आदमी मरते देखें हैं ...