Best social stories in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

अंग्रेजियत पर हिंदी दिवस का कटाक्ष
by AKANKSHA SRIVASTAVA

हिंदी को वनवास दे दिया,अंग्रेजी को राज हम हिंदुस्तानियों ने सत्तर साल में कैसा गढ़ दिया समाज , बदल गया हिंदी का इतिहास,फिर हावी हो गया अंग्रेजियत का एक ...

सुरतिया - 1
by vandana A dubey

’नमस्ते बाउजी. कैसे हैं?’बाहर बरामदे में बैठे बाउजी यानी रामस्वरूप शर्मा जी, सुधीर के दोस्त आलोक के इस सम्बोधन और उसके पैर छूने के उपक्रम से गदगद हो गये. ’ठीक ...

યોગ-વિયોગ - 45
by Kaajal Oza Vaidya

યોગ-વિયોગ કાજલ ઓઝા વૈદ્ય પ્રકરણ -૪૫ અભય અને અજય ટેબલ પર બેઠા હતા.જાનકી અલયના ખભે માથું મૂકીને રડી રહી હતી. ‘‘શું થયું ?’’ કોઈએ જવાબ ના આપ્યો, ‘‘શું થયું ...

विभाजन - 2
by Ankush Shingade

विभाजन (कादंबरी) (2) ही देवळं पाडण्यानं व जबरदस्तीच्या धर्मपरीवर्तनानं मजबुरीनं जरी येथील मुस्लीम वगळता इतर धर्म चूप बसले असले तरी त्यांच्याही मनात असंतोष खदखदत होता. सामान्य माणसांमध्येही छोट्या छोट्या ...

अरक्षित
by Deepak sharma

अरक्षित उनका घर इन-बिन वैसा ही रहा जैसा मैंने कल्पना में उकेर रखा था| स्थायी, स्वागत-मुद्रा के साथ घनी, विपुल वनस्पति; ऊँची, लाल दीवारों व पर्देदार खुली खिड़कियाँ लिए ...

મેલું પછેડું - ભાગ ૨૧
by Shital

                    હેલી એ એકલા જ ગામ સુધી આવવાનો નિણૅય પરબત ને ફસાવવા લીધો. રિસોર્ટ થી એકલી સીમ ના વાંકાચૂંકા રસ્તે ...

नश्तर खामोशियों के - 4
by Shailendra Sharma

नश्तर खामोशियों के शैलेंद्र शर्मा 4. किसी स्कूटर के स्टार्ट होने के स्वर से जैसे में नींद से जगी. मरे हुए लम्हों को बार-बार अपने भीतर जिंदा करते हुए,मैं ...

आवरण
by Raja Singh

आवरण राजा सिंह विशेष सोच रहा हैं। आने का सम्भावित समय निकल गया हैं।.........अब तो सात भी बज चुके हैं। शंका-कुशंका डेरा डालने लगी थीं।.........अणिमा अब तक निश्चय ही ...

यारबाज़ - 16 - अंतिम भाग
by Vikram Singh

यारबाज़ विक्रम सिंह (16) घर के अंदर प्रवेश करते ही जैसे ही मैं अपने जूते के तसमें खोलने लगा कि मां ने रसोई से ही मुझे कहना शुरू किया," ...

अपने-अपने इन्द्रधनुष - 6
by Neerja Hemendra
  • 105

अपने-अपने इन्द्रधनुष (6) काॅलेज से लौटते समय मेरी और चन्द्रकान्ता की इच्छा पुनः कुछ दूर पैदल चलने की हो रही थी। मार्ग में चलते हुए हम दोनों सायं की ...

आखा तीज का ब्याह - 9
by Ankita Bhargava
  • 126

आखा तीज का ब्याह (9) “ओहो, अब तो हमारी डॉ. वासंती होटल की मालकिन बन गयी है| अगर कभी हम तुम्हारे यहां घूमने आये तो तिलकजी को कह कर ...

30 शेड्स ऑफ बेला - 16
by Jayanti Ranganathan
  • 105

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Day 16 by Harish Pathak हरीश पाठक ठहरी हुई शाम बेला के कदम आगे बढ़ने से इंकार कर ...

दास्तानगो - 1
by Priyamvad
  • 39

दास्तानगो प्रियंवद अंतिम फ़्रांसीसी उपनिवेश के अंतिम अवशेषों पर, पूरे चाँद की रात का पहला पहर था जब यह द्घटना द्घटी। समुद्र की काली और खुरदरी चट्टानों पर चिपके ...

પગરવ - 35
by Dr Riddhi Mehta
  • (47)
  • 608

પગરવ પ્રકરણ – ૩૫ સુહાની બેડ પર સૂવા તો ગઈ પણ એને ઉંઘ ન આવી. એને થાય છે કે એ પોતાને લીધે બીજાને પણ મુશ્કેલીમાં મૂકી રહી છે. એણે ...

राम रचि राखा - 6 - 4
by Pratap Narayan Singh
  • 36

राम रचि राखा (4) सवेरे जब मुन्नर द्वार पर नहीं दिखे तो पहले माई ने सोचा कि दिशा-फराकत के लिए गए होंगे। परन्तु जब सूरज ऊपर चढ़ने लगा फिर ...

अनिर्णय
by Pavitra Agarwal
  • 225

अनिर्णय पवित्रा अग्रवाल "आरती अभी से सोने चल दी ? ...कुछ देर गप्पें ही लगाते ।' "नीलम क्यों परेशान करती है, उसे सोने दे। आज तो उसने सपनों की ...

सड़क पार की खिड़कियाँ - 2
by Nidhi agrawal
  • 108

सड़क पार की खिड़कियाँ डॉ. निधि अग्रवाल (2) लंचब्रेक में मैंने आज एकांत नहीं तलाशा… सबके साथ ही लंच किया। बॉस वहाँ से गुज़रा पर मेरी हँसी नहीं छीन ...

गूंगा गाँव - 11
by रामगोपाल तिवारी (भावुक)
  • 156

ग्यारहगूंगा गाँव 11 रात भर बादल छाये रहे। लोग पानी बरसने की आश लगाये रहे। पानी की एक भी बूँद न पड़ी। सुबह होते-होते आकाश पूरी तरह साफ हो ...

गूगल बॉय - 5
by Madhukant
  • 180

गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 5 गाँव में प्रत्येक वर्ष जन्माष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। एक मास पूर्व गाँव के ...

वटवृक्ष
by Rama Sharma Manavi
  • 144

      आज मानसी को अवसादग्रस्त हुए एक वर्ष से अधिक  हो गए।अभी कुछ माह पूर्व तक जब भी वह अपने पति से अपनी मानसिक,शरीरिक तकलीफों के बारे ...

પ્રગતિના પંથે - 4 - જ્યોતિ બિંદુ
by MB (Official)
  • 114

પ્રગતિના પંથે (પ્રેરણાત્મક વાર્તાઓ) 4 જ્યોતિ બિંદુ યુગો પુરાની વાત છે. અંધકારમાં વિલીન થવાની થોડી વાર પહેલા સુરજે ધરતી પર રહેલ સમગ્ર સજીવ - નિર્જીવ સૃષ્ટિને સંબોધીને કહ્યું, હવે ...

દ્દષ્ટિભેદ - 5 - છેલ્લો ભાગ
by નિ શબ્દ ચિંતન
  • 204

ઉર્વેશભાઈ હેતને ચેતવતા કહે છે: "જો હેત, સંચયભાઈએ કિધુ છે એટલે તને અહિયા રેહવા દઉ છુ, પણ કોઈ પણ ફરીયાદ ના આવી જોઈએ."હેત: "અરે તમેંં બિંદાસ થાઈને જાઓ,  આશ્રમ ...

एनीमल फॉर्म - 7
by Suraj Prakash
  • 90

एनीमल फॉर्म जॉर्ज ऑर्वेल अनुवाद: सूरज प्रकाश (7) कड़ाके की सर्दियां पड़ीं। तूफानी मौसम अपने साथ ओले और हिमपात लेकर आया। उसके बाद जो कड़ा पाला पड़ा, वह फरवरी ...

जिंदगी मेरे घर आना - 8
by Rashmi Ravija
  • 396

जिंदगी मेरे घर आना भाग – ८ ‘अंकल... शरद ने शायद कुछ प्रतिवाद में कहा था पर यहां सुनने की फुर्सत किसे थी। वह तो उछलती, कूदती दूर निकल ...

इक समंदर मेरे अंदर - 10
by Madhu Arora
  • 120

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (10) वे उपनगर पर उपनगर बदलते जा रहे थे और लोग छूटते जा रहे थे पीछे। यदि कभी कहीं मिल जायें और पहचान ...

पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 23
by Pragati Gupta
  • (15)
  • 798

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 23. समीर के होने पर शिखा से प्रखर की बातें व्हाटसप्प पर ही ज़्यादा हुआ करती थी| जब भी समय मिलता दोनों अपने दिल की बातें ...

गवाक्ष - 28
by Pranava Bharti
  • 135

गवाक्ष 28== अट्ठारह वर्ष की होने पर भव्य समारोह में धूमधाम से सत्याक्षरा का जन्मदिन मनाते हुए पिता सत्यालंकार को दिल का भयंकर दौरा पड़ा और परिवार में दुःख और मायूसी के ...

ઘડપણનો સહારો
by અજ્ઞાત
  • 166

             " એ હાલ, ભેરુ.. એ હાલ, મેરુ..."ખેડૂતની બૂમ પર ધરતીને ઉથલપાથલ કરતા બળદની જોડ મેરુ અને ભેરુ પોતાની જુવાનીનું જોર ખેતરમાં દાખવી રહ્યા હતા.   ...

क्या नाम दूँ ..! - 1
by Ajay Shree
  • 336

क्या नाम दूँ ..! अजयश्री प्रथम अध्याय “आखिर तुमने मुझे समझ क्या रखा है ! आज पाँच साल तक साथ रहने के बाद तुम कह रहे हो कि मैं ...

उलझन - 1
by Amita Dubey
  • 924

उलझन डॉ. अमिता दुबे एक नीचे के फ्लैट में जब से अंशी यानि अंशिका रहने आयी है तब से सोमू यानि सौमित्र का जीवन ही बदल गया है। इससे ...