Best social stories in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

दास्ताँ ए दर्द ! - 3
by Pranava Bharti

दास्ताँ ए दर्द ! 3   वह दिन प्रज्ञा के लिए यादगार बन गया था | वह अकेली लंदन की सड़कों पर घूम रही थी, किसी भी दुकान में घुसकर 'विंडो-शॉपिंग' करने ...

बस एक कदम... - 2
by Zakia Zubairi

बस एक कदम.... ज़किया ज़ुबैरी (2) साढ़े ग्यारह बजे वाली सफ़ेद रात में डर ज़रा अधिक ही समाया होता है। ऐसे में आहिस्ता आहिस्ता गाड़ी स्टेशन में दाख़िल हुई। ...

क्रान्तिकारी - 2
by Roop Singh Chandel

क्रान्तिकारी (2) शांतनु भी उन लाखों दिल्लीवासियों में से एक था जो नौकरी की तलाश में इस महानगर में आते हैं. वैसे वह पटना के एक गांव में जन्मा ...

जड़ें
by Nasira Sharma

जड़ें ”इंडिया---इंडिया---कैसा होगा इंडिया|“ गुलशन ने बहते आँसुओं को पोंछते हुए अपनी नीग्रो आया से पूछा।”अच्छा, बहुत अच्छा।“ नीग्रो आया ने उसके आँसू पोंछकर चट-चट उसके दोनों गालों का ...

હાઉસ મેનેજર
by Jeet Gajjar

“મીરા તેના પતિ વિરલ ને કહેવા લાગી હું થાકી ગઈ મને પણ હવે નોકરી કરવી છે, બસ!” વિરલે જવાબમાં કહ્યું કે પણ શું કામ? તને આખરે શું ખામી છે ...

योगिनी - 19 - अंतिम भाग
by Mahesh Dewedy

योगिनी 19 तूफ़ान के रुकने पर घनघोर अंधकार छा चुका था. जुगुनू की भांति यत्र-तत्र टिमटिमाते तारे ही पृथ्वी को केवल इतना प्रकाश प्रदान कर रहे थे कि मीरा ...

Beyond The Water - 2
by Prabodh Kumar Govil

Beyond The Water (Translation of Hindi Novel - Jal Tu Jalal Tu) (2) The specimen of the box had been designed on the basis of the photograph that the ...

कौन दिलों की जाने! - 39
by Lajpat Rai Garg

कौन दिलों की जाने! उनतालीस कँपकँपाने वाली ठंड चाहे नहीं रही थी, फिर भी सुबह की चाय रजाई में बैठकर ही पीने को मन करता था। चाय पीते हुए ...

दो अजनबी और वो आवाज़ - 14
by Pallavi Saxena

दो अजनबी और वो आवाज़ भाग-14 न जाने कहाँ से किसी हवा के झोंके कि तरह रजिस्थान की वो ठंडी रात मेरे दिमाग को छूकर निकल जाती है और ...

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी - 3 - अंतिम भाग
by PANKAJ SUBEER

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी (कहानी पंकज सुबीर) (3) उसके बाद की बरसात श्रीमती शीला देवी के लिए वैसी नहीं रही, जैसी कष्टदायक उस दिन ...

પુનર્જન્મ. - 40
by Rajendra Solanki

"પુનર્જન્મ"-40------------------  નિમ્મુએ તેની સાથે ભીસાઈને કહ્યું,"અરે,કોઈ આવી જશે".  "નિમ્મુ,કોઈ આવે તે પહેલાં મારે તને એક વાત કહેવી છે."  "એક શું વ્હાલા દસ કહોને"  "નિમ્મુ,તને આપણી જ્યોતિ માટે પાર્થ કેવો ...

दरमियाना - 11
by Subhash Akhil
  • 36

दरमियाना भाग - ११ दरअसल, इसके जर्मनी जाने की बात प्रताप गुरू को पता चल गई थी । वह नहीं चाहता था कि यह उसके हाथ से निकले । ...

बेटी के मोबाइल की घंटी
by Manoj kumar shukla
  • 84

                                                          ...

ઈર્ષા
by Khushi Trivedi
  • (20)
  • 369

ઈર્ષા એ એક એવો શબ્દ છે જે માનવ જીવનને બરબાદ કરે છે અને બીજાના જીવનને અસ્વસ્થ અને છીન્નભિન્ન બનાવે છે. જો તમે કોઈને સુખ અથવા આનંદ આપી શકતા નથી, ...

कुबेर - 9
by Hansa Deep
  • 90

कुबेर डॉ. हंसा दीप 9 स्कूल की यादें धन्नू के लिए एक दु:स्वप्न की तरह थीं लेकिन बुनियाद वहीं रखी गयी थी। फीस के पैसों की उगाही बार-बार उसके ...

કામ આપવું કે દાન ?
by Mahesh Patel
  • 548

હું બરાબર બપોરના બળબળતા તાપમાં એક મિત્રની રાહ જોઈ નાના વરાછા ચોપાટી પાસે એક વૃક્ષની શીતળ છાયામાં ઉભો હતો. ઘણી રાહ જોઈ પણ મિત્ર ના આવ્યો તેથી હું રાહ ...

ती एक शापिता! - 1
by Nagesh S Shewalkar
  • 100

ती एक शापिता! (१) सुबोधराव दिवाणखान्यात वर्तमानपत्र वाचत बसले होते. सकाळपासून किती वेळ त्याचे वाचन केले असेल हे त्यांनाही माहिती नसेल. एक चाळा, वेळ जाण्याचे साधन म्हणून वर्तमानपत्र हातात ...

एहसास का दंश
by Krishna manu
  • 60

कहानी                                                          ...

बहू आई है तो
by Satish Sardana Kumar
  • 152

वह आज की आखिरी क्लास खत्म करके धीरे धीरे चला आ रहा था।कितना खराब गुजरा था आज का दिन।शुक्र है स्कूल में उसका यह आखिरी साल था।उसके बाद उसने ...

आळसवाद-चार तुकडे एक जोडकाम (दीर्घकथा) - 3
by लेखनवाला
  • 24

पात्र क्रंमाक दोन = तुम्ही  “सगळं चालयं तसं नाही चालू दयायचं, तुम्हाला चेंज हवाय, कश्यात? एकूण जगण्यात, रोजची बातमी नाय वाचायची तर ती बनायचीय, तुम्ही त्याच तयारीत आहात” प्लॅन ...

દ્દષ્ટિભેદ - 3
by નિ શબ્દ ચિંતન
  • 134

રેવા: તારી ગોઠવણ ખબર નથી પડતી મને સંચય. તે એમને ખાલી તારા કાર્યક્રમ પુરતા મનાવી લીધા. તારે એમને સમજાવવુ જોઈઍ કે ઍ જે વિચારે છે એ ખોટી છે. સંચય: ( ...

ગુલાબની કળી - 2
by Dr.Bhatt Damaynti H.
  • 106

ક્રમશઃ- ભાગ-૧ થી,,,,,,ચાલુ,,,,,, તો હે,,,,દાદીમા,,,,દાદાને જ્યારે ધંધામાં ખોટ ગઈ હતી,, ત્યારે તમને કોણે મદદ કરી હતી,,?, માનસીબેન,,, (દાદીમા) બોલ્યાં,,, અ તો છે ને મારા નણંદબા,,, રાધાબેન ખૂબ જ પૈસાવાળા ...

आओ थेरियों - 2
by Pradeep Shrivastava
  • 106

आओ थेरियों प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 मैं भी जाने-अनजाने इसका हिस्सा बन गई हूं। मगर दिमाग में यह बात आने के बाद मैं इससे मुक्ति के प्रयास में हूं। ...

સાચી મદદ
by Jeet Gajjar
  • (13)
  • 210

નીલ અને ખુશી એક સરકારી સ્કૂલ માં જોબ કરી રહ્યા તે દરમિયાન બંને ને પ્રેમ થયો ને લગ્ન પણ કરી લીધાં. નીલ અને ખુશી બંને નું લગ્ન જીવન ખુબ ...

दास्ताँ ए दर्द ! - 2
by Pranava Bharti
  • 52

दास्ताँ ए दर्द ! 2   रवि पंडित जी ! ओह ! अचानक कितना कुछ पीछे गया हुआ स्मृति में भर जाता है | रीता व देव की देखा-देखी रवि पंडित जी ...

ક્યાં છે એ? - 4
by Bhavisha R. Gokani
  • 354

ક્યા છે એ? ભાગ : 4 “બચાઓ, બચાઓ, ભુત ભુત” બીજી રાત્રે પણ બુમ સંભળાતા અક્ષિત દોડીને મમ્મીના રૂમમાં ગયો. આગલી રાત્રિના અનુભવ બાદ સગુણાબહેન વ્યવસ્થિત સુઇ ગયા બાદ ...

बस एक कदम... - 1
by Zakia Zubairi
  • 52

बस एक कदम.... ज़किया ज़ुबैरी (1) “नहीं मैं नहीं आऊंगी।” शैली को अपनी आवाज़ में भरे आत्मविश्वास पर स्वयं ही यक़ीन नहीं हो पा रहा था।... और वह ख़ामोश ...

क्रान्तिकारी - 1
by Roop Singh Chandel
  • 26

क्रान्तिकारी (1) समस्या ज्यों-की त्यों विद्यमान थी. सात महीने सोचते हुए बीत गये थे, लेकिन न तो शैलजा ही कोई उपाय सोच पायी और न ही शांतनु. ज्यों-ज्यों दिन ...

गूँगा आसमान
by Nasira Sharma
  • 72

गूँगा आसमान प़फ़रशीद ने कूरे पर तिरयाक़ का टुकड़ा लगा, लंबा कश खींचा। दरवाज़े पर मेहरअंगीज़ के हाथों की थाप पड़ी, मगर प़फ़रशीद के कान पर जू न रेंगी। ...

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी - 2
by PANKAJ SUBEER
  • 92

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी (कहानी पंकज सुबीर) (2) श्रीमती शीला देवी के गौने के क़रीब दो महीने बाद ही घटनाक्रम शुरू होता है। सबसे ...