Best social stories in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

સપનું (ભાગ-૧)
by Nidhi

''સપનું''તૃપ્તિ, વડોદરાના મધ્યમવર્ગ પરિવારની ત્રણ ભાઈ બહેનમાં સૌથી નાની લાડકી દીકરી. એણે બારમા સુધી વડોદરામાં અભ્યાસ કર્યા પછી અમદાવાદની એન્જીયરિંગ કોલેજમાં પ્રવેશ લીધો હતો. રીના, શીતલ અને શિખા ની ...

અકબંધ રહસ્ય - ૧
by Matangi Mankad Oza Verified icon
  • (20)
  • 192

#વાર્તા_ભાગ_એક#આંખો બંધ કરીને ઋત્વા પડી હતી, નીંદર તો આવવાની હતી નહીં પણ આંખો ખોલી જાગવાની ઈચ્છા પણ થતી ન હતી. આજે પ્રથમના  માસી આવ્યા હતા. બે દિવસથી એમની આગતા ...

સેવા
by Jayesh Soni
  • (10)
  • 224

વાર્તા:-સેવા  લેખક-જયેશ એલ.સોની.ઊંઝા મો.નં.97252 01775 " એ રમણિયા એ રમેશિયા ક્યાં ખોવાઇ ગયા છો અલ્યા મારી અંતિમ ઘડી આવી ગઇછે હવેતો મળવા આવો." સવારથી જેઠાભા નું આ રટણ ચાલતું ...

ठौर ठिकाना - 1
by Divya Shukla
  • (1)
  • 17

ठौर ठिकाना (1) आज दिन भर की भागदौड़ ने बुरी तरह थका दिया था मुझे. घर में घुसते ही पर्स बेड उछाल दिया और सीधे वाशरूम में घुस गई. ...

मुख़बिर - 20
by राज बोहरे
  • (2)
  • 29

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (20) मुठभेड़ मजबूतसिंह उस दिन अपने कंधे झुकाये जमीन पर आंख गढ़ाये हुए आता दिखा तो हम सबको उत्सुकता हुई । कृपाराम लपक के मजबूतसिंह से ...

परिवर्तन की लहर
by Anju Gupta
  • (2)
  • 38

मुक्ता लगभग 25 वर्ष की थी और शहर के नामी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग में लेक्चरर थी l विभाग में ज्यादातर लोग बड़ी उम्र के थे , इसलिए उसका ...

राहबाज - 9
by Pritpal Kaur Verified icon
  • (3)
  • 42

निम्मी की राह्गिरी (9) वो छिप छिप कर मिलना दोनों डब्बे उठाये अनुराग के बारे में सोचती मैं घर चली आयी थी. घर आ कर माँ को मिठाई वाला ...

काश! ऐसा होता.....
by Sudha Om Dhingra
  • (1)
  • 35

काश! ऐसा होता..... सुधा ओम ढींगरा पति की नौकरी ही ऐसी थी कि देश-देश, शहर-शहर घूमते हुए अंत में, हम भूमण्डल के एक बड़े टुकड़े के छोटे से हिस्से ...

गाली की धिक्कार
by मन्नू भारती
  • 43

भारी कदमों के साथ वह आगे बढ़ा। जीवन में यह पहला अवसर नहीं था जब वह अपमानित हुआ या मानसिक प्रताड़ना के दंश ने उसके आंतरिक मन को कटिले ...

औघड़ का दान - 1
by Pradeep Shrivastava Verified icon
  • (3)
  • 121

औघड़ का दान प्रदीप श्रीवास्तव भाग-1 सीमा अफनाई हुई सी बहुत जल्दी में अपनी स्कूटी भगाए जा रही थी। अमूमन वह इतनी तेज़ नहीं चलती। मन उसका घर पर ...

वह लड़का
by Dr pradeep Upadhyay
  • (2)
  • 81

आज वह पन्द्रह वर्ष के बाद मुझसे मिलने आया था---हाथों में मिठाई का डिब्बा था।जैसे ही मैंने ड्राईंग रूम में प्रवेश किया, वह उठकर खड़ा हो गया, मेरे चरण ...

इस दश्‍त में एक शहर था - 5
by Amitabh Mishra
  • 58

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र (5) अब जो दूसरी पत्नी की दो लड़कियां थीं वे बहुत ज़हीन, सुन्दर, पढ़ने लिखने में अव्वल और नौकरियां भी अच्छी ...

कौन दिलों की जाने! - 7
by Lajpat Rai Garg Verified icon
  • (3)
  • 110

कौन दिलों की जाने! सात प्रथम जनवरी, नववर्ष का प्रथम प्रभात धुंध या कोहरे का कहीं नामो—निशान नहीं था, जैसा कि इस मौसम में प्रायः हुआ करता है। आकाश ...

કબીર : રાજનીતિ ના રણમાં - 2
by Ved Patel
  • (2)
  • 89

"ગુજરાત કલ્યાણ પાર્ટી " ના I.A.S નેતા ના ઘરે થી કરોડો રૂપિયા ની બેનામી સંપત્તિ મળે છે. જયારે પાર્ટી ના બીજા નંબર ના નેતા ની સેક્સ ક્લિપ  બજાર માં ...

लाख़ बहाने
by Vijay 'Vibhor'
  • (5)
  • 146

पण्डित भगवानदास जी का भरापूरा परिवार है। परिवार में सात बेटे, बेटों की पत्नीयाँ। पन्द्रह पोते-पोतियों की किलकारियों के संगीत से हर वक्त एक मनोहारी वातावरण घर में बना ...

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख - 4 - अंतिम भाग
by Divya Shukla
  • (2)
  • 44

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (4) जब चार पैसे आने लगे तो सास को बहू भी याद आई | वह भी साल में एक दो चक्कर लगा ही ...

હાથફેરો
by bharat chaklashiya Verified icon
  • (34)
  • 433

વાર્તા : "હાથફેરો"ઘરનું સંચાલન ડોશી પાસે હતું. બન્ને દીકરાઓ અને ડોસાની કમાણી ઘેર આવે એટલે તરત જ ડોશી, સાપ દેડકું ગળે એમ એ આવકને ગળી જતા. ઘરમાં રાખેલા ખખડધજ ...

मुख़बिर - 19
by राज बोहरे
  • (2)
  • 46

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (19) चिट्ठी मैंने सुनाना आरंभ किया । हम लोग दोपहर को एक पेड़ के नीचे बैठे थे कि दूर से धोती कुर्ता पहने बड़े से पग्गड़ ...

लुटलुटी
by Satish Sardana Kumar
  • (2)
  • 232

राजबीर थानेदार जाति से जाट था।वह इंसानों और घटनाओं को जातीय खाँचे में फिट करके सोचने का आदी था।वह कोई सीधा थानेदार भर्ती नहीं हुआ था बल्कि कांस्टेबल से ...

સંવેદના ના સુર (ઉત્તરાયણ સ્પેશિયલ)
by Naresh Gajjar
  • (14)
  • 186

સંવેદના ના સૂર....(ઉત્તરાયણ સ્પેશિયલ)"હસરતે તો થી આસમાન કો છુને કી ,મગર" "હવાઓ કે રૂખ કા હમ  એતબાર કર  બૈઠે"..                      ...

राजनीति
by Shikha Kaushik
  • (5)
  • 255

शाम ढलने लगी थी .आधा नवम्बर बीत चुका था .सुहानी हवाओं में बर्फ की ठंडक घुलने लगी थी .शॉल ओढ़कर साहिल खिड़की से बाहर के नज़ारों को देखने लगा ...

ஆவினம்குடி ஓரத்திலே - 2
by c P Hariharan
  • 111

திரும்பவும் கொஞ்சம் நாள் கழித்து அவர்கள் கிராமத்தில் வரலானார். இப்போது தானே வந்திட்டு போனார்கள். திரும்பவும் எதற்க்காக வந்திருக்கிறார்கள் என்று எல்லோரும் அதிர்ந்து போனார்கள் அப்போது தான் புரிந்தது இந்த தடவை அவர்கள் எதுவும் கேட்டு வாங்கி ...

પાર્થ
by Jeet Gajjar Verified icon
  • (35)
  • 351

શહેર ની બહાર આવેલી જીઆઇડીસી માં મંદી ના કારણે ઘણી ફેક્ટરી બંધ હતી. અમુક તો દિવસ પૂરતી ચાલુ રહેતી. પણ પેલા ની જેમ ધમધમતી ન હતી. રોજ ટાઇમ સર ...

“उल्लेखनीय भारतीय संस्कृति जो भारत को अद्भुत बनाती हे”
by Narendra Rajput
  • (3)
  • 96

भारतीय संस्कृति का उल्लेख सिर्फ देश में नहीं विदेशों में भी किया जाता है। संस्कृति का मान सम्मान भारत में ही होता है जिसके कारण अन्य देश भी भारतीय ...

कौन दिलों की जाने! - 6
by Lajpat Rai Garg Verified icon
  • (7)
  • 133

कौन दिलों की जाने! छः 31 दिसम्बर रात को आठ बजे प्रधानमन्त्री जी का राष्ट्र के नाम सन्देश प्रसारित होना था, इसलिये आलोक ने सात बजे ही सामने वाले ...

राहबाज - 8
by Pritpal Kaur Verified icon
  • (3)
  • 73

निम्मी की राह्गिरी (8) मैं प्यार हूँ मैं ठन्डे पानी से नहाती हूँ हर रोज़. पानी की धार तेज़ी के साथ मेरे सामने रखी बाल्टी को भर रही है. ...

ठहरी हुई धूप
by Kailash Banwasi
  • (1)
  • 538

ठहरी हुई धूप कैलाश बनवासी हमेशा की तरह मम्मी ने ही जगाया था—ए-ए–s s s ई सीटू ! उठो ! ऊँ s s s अ.... वह नींद में कुनमुनाया. ...

વાત્સલ્યનો વલોપાત?
by Bhajman Nanavaty
  • (6)
  • 105

  વાત્સલ્યનો વલોપાત? ‘તને દેવુએ વાત કરી, ભાઇ ?’ માએ ડાઇનીંગ ટેબલ પર મારી સામે બેઠક લેતાં પૂછ્યું. ‘શાની વાત, મા ?’ મેં દેવાંશી સામે નજર નાખતાં વળતો પ્રશ્ન ...

મહિસાગરના કાંઠે
by vipul parmar
  • (2)
  • 126

       દિવાળીનું મીની વૅકેશન પછી ઉનાળુ વૅકેશન શરૂ થતાં જ મારા પગ વતનની વાટે જ ચડતા.આર્થિક રીતે પછાત અલબત્ત ઘરની જવાબદારીઓના ભારથી સહેજ હળવો થવા શહેરના ધમાલ્યા ...

भगवान की भूल - 9 - अंतिम भाग
by Pradeep Shrivastava Verified icon
  • (6)
  • 168

भगवान की भूल प्रदीप श्रीवास्तव भाग-9 मैंने हर बाधा का रास्ता निकाला और सारी रस्में पूरी कीं। सिर भी मुंडवा दिया। मैं वहां हर किसी के लिए एक अजूबा ...