Social Stories free PDF Download | Matrubharti

डुबकी
by Geeta Shri
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वह लौट रही है अपने घर, मन में तरह तरह की शंकाएं, आशंकाएं लिए। क्या होगा जब वह घर लौटेगी। हरीश कितना खुश होगा। गुड्डी, चिंटू तो खुशी के ...

जयंता - 3
by Sane Guruji verified
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सायंकाळी वेळ होती. महालक्ष्मी स्टेशनात मी होतो. गाड्या भरुन येत होत्या. जागा मिळेना घुसायला, दार धरुन उभे राहायला मला धैर्य होत नव्हते. जेव्हा मोकळी जागा मिळेल तेव्हाच गाडीत बसेन ...

जादू की छड़ी
by Sapna Singh
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मैं उन दिनों अपनी दीदी के यहां गई थी। जीजाजी अॅाफिसर थे। गाड़ी बंगला मिला हुआ था। लिहाजा छुट्टियां बिताने की इससे बेहतर और कौन सी जगह हो सकती ...

परिणीता - 3
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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चारूबाला की माँ का नाम मनोरमा था। ताश खेलने से बढ़कर उन्हें और कोर्इ शौक न था। परंतु जितनी वह खेलने की शौकीन थीं, उतनी उनमें खेलने की दक्षता ...

સંબંધ નામે અજવાળું - 17
by Raam Mori
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આંખ બંધ કરીએ અને નાનપણની અમુક ક્ષણોને વિચારીએ એટલે ચહેરા પર આપોઆપ અમુક સ્મિત અકબંધ થઈ જાય. બાળપણ કોરા કેનવાસ જેવું હોય છે. સમય અને અનુભવના રંગો એ કોરા ...

કાવડિયા - ૧
by Bina Balbhadra
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      આ પૃથ્વી ઉપર દરેક જીવ કંઈક આશા-અપેક્ષા,એષણા વૃતિ ,પ્રવૃતિ,ભાવ - અભાવ, ક્રિયા -પ્રતિક્રિયા વગેરે સાથે લઈને જીવતા હોય છે.      આ અફાટ,અમર્યાદિત નીલો સતત ઘૂઘવયા કરતો દરિયો ...

કુદરત ની ક્રુરતા - 1 - 2
by Naranbhai Thummar
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માતૃ ભારતી પર આ મારું પ્રથમ પ્રકાશન છે.કોલેજ માં અભ્યાસ કાળ દરમ્યાન ટુંકી વાર્તાઓ, હાઈકુ, ગઝલો વગેરે લખતો.પરંતુ ગ્રેજ્યુએશન બાદ નોકરી અને સંસાર માં એવા ગુંચવાઇ ગયા કે લેખન ...

परिणीता - 2
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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श्याम-बाजार के एक सुख-संपन्न भरपूर-वैभवशाली परिवार में शेखर की शादी की बात चल रही थी। वे लोग आज आए थे, विवाह मुहूर्त अगले माह ही निशिचत करने की बात ...

आखर चौरासी - 10
by Kamal
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घर पर हरनाम सिंह की पत्नी काफी चिन्तित थी। जैसे ही वे घर में घुसे, वह रसोई से निकल कर उनके पास आ गई। ‘‘आज तो आपको जल्दी घर आ ...

दिन के आरे बारे और रात के दिया बारे
by Vikash Raj
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बचपन में जब भी मैं मां के उम्मीद से ज्यादा पैसा खर्च करता तो मेरी हमेशा एक कहावत कहा करती थी 'दिन के आरे बारे और रात के दिया ...

आसपास से गुजरते हुए - 13
by Jayanti Ranganathan
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इस तरह 18 जून, 1997 को मैं दिल्ली पहुंच गई। मुंबई से दिल्ली का सफर मैंने हवाई जहाज से तय किया। शाम के वक्त विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, ...

દેશ કાજે દિવાળી
by karansinh chauhan
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દેશ કાજે દિવાળી         (ચાલવાનું કર્યું શરુ છે તો જજો છેડા સુધી રસ્તામાં મંજિલ મળે ના મળે )                  પ્રાકૃતિક અને સાંસ્કૃતિક સોંદર્યથી ભરપુર ભરેલું એવું ઉલ્લાસપુર નામે ...

परिणीता - 1
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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विचारों में डूबे हुए गुरूचरण बापु एकांत कमरे में बेठें थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा-‘बाबू! बाबू। माँ ने एक नन्हीं सी बच्ची को जन्म दिया है।’ यह ...

मैं जीत गई
by S Bhagyam Sharma
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‘‘अम्मा आपने हमारी परवरिश ठीक से नहीं की' ये सुन सरोजनी का दिल धक से रह गया। जब बेटा मेरे गर्भ में था, तब मैंने रविन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं ...

जयंता - 2
by Sane Guruji verified
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“बये, नको जाऊ कामाला. तू घरीच राहा आज. राहतेस का?” लहान बाबू म्हणाला. “जायला हवं मला. कांडण आहे. न जाऊन कसे चालेल? मी दुपारची येऊन जाईन हा. तू पडून राहा. ...

सैलाब - 11
by Lata Tejeswar renuka
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फिर पुराने कुछ अखबार निकाल कर उनमें कुछ ढूंढने लगी। एक एक कर अखबार निकालती पढ़ती और कोने में रख देती पर एक भी ऐसा अखबार नहीं मिला कि ...

पल जो यूँ गुज़रे - 15
by Lajpat Rai Garg
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दिल्ली जाने से दो दिन पहले जब निर्मल ने बीस दिन के अवकाश का प्रार्थना—पत्र डिपार्टमेंट के ऑफिस में दिया तो क्लर्क ने उसे एचओडी (विभागाध्यक्ष) से मिलकर अपना ...

द टाइम्स ऑफ इशरत (पत्र शैली)
by Khan Ishrat Parvez
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मैं रमिया बिहाऱ प्रवास के दौरान दोस्तो को पत्र लिखता रहता था क्योंकि तब मोबाइल की सुविधा नही थी। यह आपको विचित्र लग सकता है कि मैं अपनेपत्र अक्सर  ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 12
by Neelam Kulshreshtha
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समझ ही नहीं आता तुम हमारी ही बहन हो क्या ? दामिनी जब भी कामिनी से मिलती, उससे यह प्रश्न ज़रूर पूछती पता नहीं, माँ-पापा से ...

સુખ ની શોધમાં…
by Rahul Desai
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આજની આ ભાગતી જિંદગી મા કોને સમય છે કઈ વિચારવાનો કે પછી કઈ કરવાનો. સવાર થી સાંજ ઘડિયાળ ના કાંટા ની જેમ ભાગે છે અને મજૂરી કરે છે. એને ...

नया उजाला
by Dr. Vandana Gupta
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     वह बहुत देर से कीचैन हाथ में लिए बैठा था। वह कोई ऐसा वैसा कीचैन नहीं था, बहुत स्पेशल था, कॉलेज के आखिरी दिन अविका ने दिया ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 2
by Ankita Bhargava
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पीले रंग का टॉप और ब्लू जींस पहन कर नयना तमन्ना के घर पहुंची। पर गली में उसके घर की ओर मुड़ते ही उसके पैर जम गए। तमन्ना के ...

चाकर राखो जी...
by Sapna Singh
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चारू तुम भी आ रही हो न हमारे साथ ---!’’ लंच ब्रेक में उसकी मेज की ओर आती हुई मालती ने पूछा था ‘‘कहां भाई.......?’’ उठते हुए पूछा उसने ...

और फिर क्या?
by Pritpal Kaur
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“आखें बंद कर के देखोगे तो अँधेरा ही दिखाई देगा.” विजय ने झुंझलाते हुए ऊंची आवाज़ में कहा. सुधाकर बड़े भाई की बात सुनते ही क्रोध से भर उठा. उसे ...

अधूरी हवस - 7
by Balak lakhani verified
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(7) राज मिताली के फोन के बाद सोचता है, अखिर कर मिताली मुजसे क्यू मिलना चाहती है?, ए भी सब की तरह पहेले भाव खाती है बाद मे अपने ...

ગેરસમજણ
by Shreyash Manavadariya
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કોલેજ માં મારો પેહલા દિવસ હતો. હું ક્લાસ માં દાખલ થયો. મને ક્લાસ માં આવતા મોડું થઈ ગયું હતું એટલે બધા આવી ને બેસી ગયા હતા. મે કમ્પ્યુટર એન્જિનિયરિંગ ...

आखर चौरासी - 9
by Kamal
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हरनाम सिंह जब डॉक्टर जगीर सिंह के दवाखाने के सामने से गुजरे तो उनकी नज़रें स्वतः ही खिड़की की ओर मुड़ गईं। बल्ब की पीली रोशनी में जगीर सिंह ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 11
by Neelam Kulshreshtha
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अनु हमेशा मुंबई के दिन याद करती रहती है अनुभा को जब फ़ुर्सत मिली अनु आँटी के पास कुछ गर्मागर्म खाने पहुँच गए एम.डी करने के ...

ધર્મ નું કાચું ગણિત
by Ridhsy Dharod
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રવિ આજે ખુબ જ નર્વસ હતો. એ સતત ડર ના કારણે પોતાના પગ હલાવી રહ્યો હતો. ૧૨ વર્ષ ના આ વિધાર્થી ને પોતાની શાળા નું નામ રોશન કરવાની ચિંતા ...

यादें - 2
by प्रियंका गुप्ता
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एक अजीब सी बेचैनी तारी हो गई थी मुझ पर...। क्या हो रहा होगा वहाँ...? काश, मैं तुम्हारे साथ होती। वैसे तुम अकेले भी नहीं थे, अच्छा-खासा स्टॉफ़ गया ...