Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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  • पवित्र बहु - 11

    दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थ...

  • भोर की गलती (मां का कहर)

    मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था।...

  • બંધન મુક્તિ

    માનવ જીવનમાં આપણે ઘણીવાર એવું માનીએ છીએ કે આપણું સુખ કે દુઃખ બહારની પરિસ્થિતિઓ પ...

पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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জীবন দর্শন By PRINCE PREMKUMAR

আমার ধর্ম, বর্ণ, সংস্কৃতি, শিক্ষা, সামাজিক মর্যাদা, সম্পদ ইত্যাদির কারণে আমি তোমার চেয়ে শ্রেষ্ঠ নই। আমি নই, তুমিও নও। আমাকে অবশ্যই মেনে নিতে হবে, এবং তোমারও মেনে নেওয়া উচিত, যে আ...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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આપણી માનસિકતા By Hitesh

આપણી માનસિકતાઆપણે આજે એક વાતથી આજની શરૂવાત કરીએ,એકવાર હું એક ડોક્ટરના ક્લિનિક ઉપર ગયો. ક્લિનિકના રિસેપ્શન પાછળ એક નોટિસ લખેલી હતી, એમાં લખું હતું, 'આજથી અને અત્યારથી દર ગુરુવાર...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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स्वर आले जुळूनी - भाग 2 By Prof Shriram V Kale

पण कुणी नवशिका, येरा गबाळा असेल तर सरळ नाही म्हणायचे.काही भजनी बुवा तर मृदंग वाजवावा अशा आवेशात पेटीच्या सुरांवर खडा-खडा बोट मारायचेअसल्या वाजप्यांच्या हाती सोन्यासारखं हत्यार सोपव...

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भोर की गलती (मां का कहर) By Suman

मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था। पंडित जी रोज पूजा करने जाते थे। और मैया जी ने पंडित जी को सपना दिया - अरे बेटा तू सो रहा है अभी तक।...

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अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 By archana

1. पीढ़ियों का चक्रव्यूहये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में...

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सादगी का मजाक By Jeetendra

श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ जाता था या बिना कारण हंसता रहता था। अजीब इसलिए कि वह साफ कपड़े पहनता था, कम बोलता था, सीधा चलत...

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બંધન મુક્તિ By Sanjay Sheth

માનવ જીવનમાં આપણે ઘણીવાર એવું માનીએ છીએ કે આપણું સુખ કે દુઃખ બહારની પરિસ્થિતિઓ પર આધારિત છે. કોઈ વ્યક્તિ શું કહે છે, કોઈ સંબંધ કેવી રીતે ચાલે છે, કોઈ ઘટના કેવી રીતે બને છે. આ બધું...

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యవ్వనం సమీరం By PRINCE PREMKUMAR

మనిషి జీవితంలో ఆ భగవంతుడు సృష్టించినఒక అద్భుతకాలం యవ్వనం.ఆలోచనలకు కోరికలకు శరీరంలో జరిగే మార్పులకుఈ యవ్వనం అన్నింటికీ నిదర్శనంఈ యవ్వనం లో వచ్చే మార్పులుకలిగే ఆలోచనలు ....తీసుకునే న...

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माँ के कमरे का रहस्य By Raju kumar Chaudhary

मेरी शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन मेरा पति हर रात अपनी माँ के कमरे में सोता था। एक रात मैंने चुपके से उसका पीछा किया… और जो सच्चाई मैंने जानी, उस पर मुझे गहरा पछतावा हुआ…शादी...

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शोषण बना पीड़ा का कारण By Gauri Katiyar

आज के समय में शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन यह सुनने को मिलता है कि आज किसी के साथ अत्याचार हुआ, कल किसी और के साथ। ऐसे दरिंदों की वजह से लड़कियों की पूरी ज़िंदगी ब...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

नमस्कार मित्रो आज उजाले की ओर में डॉ. रश्मि चौबे की कविता की पुस्तक, `उद्गार` के बारे में परिचय.... मन के प्रांगण में प्रस्फुटित ‘उद्गार’ –डॉ. रश्मि चौबे  &#...

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ముందు జాగ్రత్త By kvlsandhyarani

కొండంత ఆస్తి ఉన్నా కూర్చొని తింటే కరిగిపోతుందిఅనేది మన పెద్దలు చెప్పిన సామెత.""ఏట్లో వేసినా ఎంచి వేయాలి అని మన పెద్దలు ఊరికేఅనలేదు."        వరలక్ష్మి కి చిన్నతనములోనే పెళ్లి కుదిరి...

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जनाजा By Vishram Goswami

                   उस ढलती हुई रात को भोर होने से पहले जमुना देवी की चीख ने मोहल्ले वासियों की नींद तोड़ दी। उसका करुण क्रंदन सर्द रात की हवा के झोंके के साथ मानों खिड़कियों के शीश...

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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો - 32 - Title Page By I AM ER U.D.SUTHAR

લેખકની કલમે: "પડછાયો" ના સર્જનની પૃષ્ઠભૂમિ નમસ્કાર વાચકમિત્રો,  હું, ઉમાકાંત સુથાર, વ્યવસાયે એક સિવિલ એન્જિનિયર અને હૃદયથી એક નવોદિત લેખક, મારી પ્રથમ લઘુ નવલકથા "પડછાયો: એક પેઢીના...

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જ્યાં સ્મૃતિઓ જીતી… સંબંધ હારી ગયો By Navneet Marvaniya

ગાંધીનગરના એક શાંત વિસ્તારમાં “પરફેક્ટ ફ્રેમ સ્ટુડિયો” નામનો નાનો પણ વિશ્વાસપાત્ર ફોટોગ્રાફી સ્ટુડિયો હતો. સ્ટુડિયોની અંદર કેમેરાની ક્લિક સાથે નાજુક યાદોની ફ્લેશના પડછાયા પડ્યા કરત...

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Sugar Mommy By kalpita

“आपका फॉर्म ठीक से भरा नहीं है, मैम।”“ओह, सॉरी... मैं पहली बार जिम जॉइन कर रही हूँ, थोड़ा घबरा रही हूँ।”रिसेप्शन पर खड़ा लड़का मुस्कुराया। “कोई बात नहीं, मैं मदद कर देता हूँ। मैं र...

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ಫೇಕ್ ಪ್ರೇಮಿ By Saandeep Joshi

ಫೇಕ್ ಪ್ರೇಮಿಯ ನಾಟಕ ಎಷ್ಟು ಬಣ್ಣದಿಂದ ಕೂಡಿರುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತಿಳಿಯುವ ಇಚ್ಚೆ ಇದೆಯೇ?

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తల్లి ప్రేమ By kvlsandhyarani

యశోద తొమ్మిది నెలల నిండు గర్భిణిగా ఉన్నప్పుడు మూడు అంతస్తులు ఎక్కి ఏపీ స్లట్ పరీక్ష రాసి పాస్ అయ్యింది .తర్వాత డెలివరీ కి , పుట్టింటికి వెళ్లి , ఒక అబ్బాయికి జన్మనిచ్చింది.       ...

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रंग चुराने वाले बादल By Piyu soul

कहानी: “रंग चुराने वाला बादल”एकबार की बात है, एक छोटा सा गाँव था—सतरंगीपुर इस गाँव की खास बात थी कि यहाँ हर चीज़ रंग-बिरंगी थी। पेड़ नीले, फूल सुनहरे, और आसमान कभी गुलाबी तो कभी बै...

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चमत्कार By Trupti Deo

“चमत्काराच्या शोधात हरवलेला समाज — भोंदू बाबांचा वाढता कहर”आज आपण प्रगतीच्या युगात जगतोय असं आपण अभिमानाने म्हणतो… मोबाईल, इंटरनेट, विज्ञान, शिक्षण — सगळं आपल्या हातात आलंय. पण या...

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बरगद की छाया By prem chand hembram

बरगद की छायाहरखू जन्म से ऐसा न था।उसका दिमाग एकदम साफ और संतुलित था—मानो किसी कुशल कारीगर ने हर नट-बोल्ट कसकर लगाया हो।पर एक दिन दिहाड़ी मजदूरी करते समय मचान पर काम करते हुए अचानक...

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પુરુષ: જવાબદારીઓનો એક અજાણ્યો કિનારો By Miss Chhoti

પુરુષ: જવાબદારીઓનો એક અજાણ્યો કિનારો"પુરુષ હોવું એટલે માત્ર શારીરિક શક્તિ નહીં, પણ જવાબદારીઓના પહાડને હસતા મુખે ઉપાડવો એ છે. સમાજની વણલખી વ્યાખ્યાઓ વચ્ચે દબાઈ જતી પુરુષની સંવેદનાઓ,...

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थंड झाल्यार खावचा - भाग 7 By Prof Shriram V Kale

                 थंड झाल्यार खावचा   अंतिम भाग ७   भगवान  जेवायला लागल्यावर   शेठाणीच्या उशा जवळचा माल आपण  कसा आणला ते  बैजंतीने सांगितलं.  तिच्या उशाशी  दोन बोचकी आहेत  ही  गोष्ट...

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अम्मा - 2 By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा -२ मेरे सामने ' वाले घर से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। सुबह - सुबह सामने घर में कौन लड़ रहा है।घर जाना उचित न समझा अभी तो इस घर में खुशिया मनायी जा रही थी। घर मे नय...

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प्रकृति का महत्व और पिपलांत्री गांव की प्रेरणादायक कहानी By Gauri Katiyar

संस्कृत श्लोक :तरु-लतानां विविध-वर्गाः शं दधाने।सर्वमास्ते जन-हितार्थं संहतम्।वन्य-सम्पद् रक्षणीया सन्ततम्।शाश्वतम्, प्रकृति-मानव-सङ्गतम्।।अर्थ : ये सुंदर-सुंदर लताएँ और ये सुंदर-स...

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ममता की मिसाल सिंधूताई सपकाल By Gauri Katiyar

"अगर मन में सेवा और करुणा की भावना हो, तो एक इंसान हजारों जिंदगियों को बदल सकता है।"भारत की महान सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत थीं, जिन्होंने अपने जी...

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पर्दे के पीछे - 6 By ARTI MEENA

दादा जी ने डॉक्टर की बात सुनकर आश्चर्य से पूछा,“ऐसा क्या हो गया डॉक्टर साहब, जो आपको इतनी रात को आना पड़ा?”डॉक्टर कुछ क्षण चुप रहा।फिर वह धीरे से दादा जी के पास आया और उनके कान के...

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पवित्र बहु - 11 By archana

दिव्यम के दोस्त की शादी थी।हलचल, हँसी, तैयारियाँ…लेकिन इन सबके बीच चित्र का मन थोड़ा घबराया हुआ था।दिव्यम ने आते ही कहा—“चित्र, तुम अच्छे से तैयार हो जाना… आज तुम्हें मेरे साथ चलना...

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दादी और संदूक By Vijay Erry

---दादी और संदूकपहला अध्याय: बचपन की जिज्ञासागाँव के पुराने घर में विजय बचपन से ही उस संदूक को देखता था। लकड़ी का बना, लोहे की पट्टियों से जकड़ा हुआ, और ऊपर से पीतल का ताला लगा हुआ...

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साहूकार By राज बोहरे

साहूकार दोपहर की धूप गाँव के चौपाल पर ऐसे पसरी थी जैसे किसी बूढ़े की थकी हुई साँसें। बबूल के पेड़ की छाया में बैठे लोग चुनाव की चर्चा में डूबे थे। इसी बीच छम्मी सेठ की कोठी से बुला...

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फैक्ट्री की आड़ By राज बोहरे

फैक्ट्री की आड़ में शाम का धुंधलका धीरे-धीरे औद्योगिक इलाके पर उतर रहा था। आसमान में धुएँ की मोटी परत तैर रही थी, मानो किसी ने सूरज को काले कपड़े से ढँक दिया हो। स्पंज आयरन फैक्ट्र...

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জীবন দর্শন By PRINCE PREMKUMAR

আমার ধর্ম, বর্ণ, সংস্কৃতি, শিক্ষা, সামাজিক মর্যাদা, সম্পদ ইত্যাদির কারণে আমি তোমার চেয়ে শ্রেষ্ঠ নই। আমি নই, তুমিও নও। আমাকে অবশ্যই মেনে নিতে হবে, এবং তোমারও মেনে নেওয়া উচিত, যে আ...

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देख रहे हैं दर्पण का काम By PRINCE PREMKUMAR

आप जिनसे भी मिलते हैं, वे आपके लिए एक दर्पण का काम करते हैं। ऐसा क्यों है? हम दूसरों के साथ अपने संबंधों के माध्यम से ही खुद को सबसे अच्छी तरह समझ पाते हैं। हम केवल उन्हीं चीजों से...

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अधूरी सुरक्षा By राज बोहरे

 अधूरी सुरक्षा कलेक्ट्रेट परिसर की दोपहर हमेशा की तरह शोर और भागदौड़ से भरी हुई थी। धूल से अटे रास्तों पर इधर-उधर भागते लोग, फाइलों का बोझ उठाए बाबू, और पसीने से तरबतर फरियादी—सब म...

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क्या सब ठीक है - 4 By Narayan Menariya

क्या सब ठीक है? ************************************************* यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।हर कहानी हमार...

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वधु मूल्य By राज बोहरे

 वधू मूल्य बरसात के बादल उस दिन जैसे आसमान में ठहरे हुए थे। हवा में हल्की नमी थी और आँगन में तुलसी के पास खड़ी करुणा बार-बार घर के अंदर और बाहर झांक रही थी। उसके हाथ में दीवार से उ...

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मैं भी कभी ज़िंदा था - 1 By S B Dubey

लघु उपन्यासलेखक: S.B. Dubey    प्रस्तावनाये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जो आपके-हमारे बीच ही रहता है, पर अक्सर नज़र नहीं आता। वो जो हर रोज़ ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाता है, सपनों को कि...

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भटका रास्ता By राज बोहरे

भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर...

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अंतिम इंतज़ार By राज बोहरे

अंतिम  इंतज़ार   गाँव के आख़िरी सिरे पर खड़ा वह मकान जैसे समय के सामने हार मान चुका था। दीवारों की पलस्तर जगह-जगह से झड़ गई थी। आँगन में लगे नीम के पेड़ की छाया दोपहर की धूप को जैस...

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આપણી માનસિકતા By Hitesh

આપણી માનસિકતાઆપણે આજે એક વાતથી આજની શરૂવાત કરીએ,એકવાર હું એક ડોક્ટરના ક્લિનિક ઉપર ગયો. ક્લિનિકના રિસેપ્શન પાછળ એક નોટિસ લખેલી હતી, એમાં લખું હતું, 'આજથી અને અત્યારથી દર ગુરુવાર...

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सफलता का मुल्य By Vijay Erry

---सफलता का मुल्य लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनासफलता शब्द सुनते ही मन में चमक, ताली, सम्मान और उपलब्धि की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे जो धुंधली परतें हैं, वे...

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स्वर आले जुळूनी - भाग 2 By Prof Shriram V Kale

पण कुणी नवशिका, येरा गबाळा असेल तर सरळ नाही म्हणायचे.काही भजनी बुवा तर मृदंग वाजवावा अशा आवेशात पेटीच्या सुरांवर खडा-खडा बोट मारायचेअसल्या वाजप्यांच्या हाती सोन्यासारखं हत्यार सोपव...

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भोर की गलती (मां का कहर) By Suman

मेरी mummy ने मेरी नानी के मुंह से सच्ची घटना सुनी।एक गांव में मैया का मंदिर था। पंडित जी रोज पूजा करने जाते थे। और मैया जी ने पंडित जी को सपना दिया - अरे बेटा तू सो रहा है अभी तक।...

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अदृश्य त्याग अर्द्धांगिनी - 3 By archana

1. पीढ़ियों का चक्रव्यूहये चक्रव्यूह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है,जैसे-जैसे नई-नई प्रेमिकाएँ जन्म लेती हैं।ये सिलसिला जारी रहता है, और हर नई प्रेमिका,अनजाने में या जानबूझकर, उसी जाल में...

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सादगी का मजाक By Jeetendra

श्यामलाल को लोग पहले दिन से ही अजीब आदमी मानते थे। अजीब इसीलिए नहीं कि वह पेड़ पर चढ़ जाता था या बिना कारण हंसता रहता था। अजीब इसलिए कि वह साफ कपड़े पहनता था, कम बोलता था, सीधा चलत...

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બંધન મુક્તિ By Sanjay Sheth

માનવ જીવનમાં આપણે ઘણીવાર એવું માનીએ છીએ કે આપણું સુખ કે દુઃખ બહારની પરિસ્થિતિઓ પર આધારિત છે. કોઈ વ્યક્તિ શું કહે છે, કોઈ સંબંધ કેવી રીતે ચાલે છે, કોઈ ઘટના કેવી રીતે બને છે. આ બધું...

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యవ్వనం సమీరం By PRINCE PREMKUMAR

మనిషి జీవితంలో ఆ భగవంతుడు సృష్టించినఒక అద్భుతకాలం యవ్వనం.ఆలోచనలకు కోరికలకు శరీరంలో జరిగే మార్పులకుఈ యవ్వనం అన్నింటికీ నిదర్శనంఈ యవ్వనం లో వచ్చే మార్పులుకలిగే ఆలోచనలు ....తీసుకునే న...

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माँ के कमरे का रहस्य By Raju kumar Chaudhary

मेरी शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन मेरा पति हर रात अपनी माँ के कमरे में सोता था। एक रात मैंने चुपके से उसका पीछा किया… और जो सच्चाई मैंने जानी, उस पर मुझे गहरा पछतावा हुआ…शादी...

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शोषण बना पीड़ा का कारण By Gauri Katiyar

आज के समय में शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन यह सुनने को मिलता है कि आज किसी के साथ अत्याचार हुआ, कल किसी और के साथ। ऐसे दरिंदों की वजह से लड़कियों की पूरी ज़िंदगी ब...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

नमस्कार मित्रो आज उजाले की ओर में डॉ. रश्मि चौबे की कविता की पुस्तक, `उद्गार` के बारे में परिचय.... मन के प्रांगण में प्रस्फुटित ‘उद्गार’ –डॉ. रश्मि चौबे  &#...

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जनाजा By Vishram Goswami

                   उस ढलती हुई रात को भोर होने से पहले जमुना देवी की चीख ने मोहल्ले वासियों की नींद तोड़ दी। उसका करुण क्रंदन सर्द रात की हवा के झोंके के साथ मानों खिड़कियों के शीश...

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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો - 32 - Title Page By I AM ER U.D.SUTHAR

લેખકની કલમે: "પડછાયો" ના સર્જનની પૃષ્ઠભૂમિ નમસ્કાર વાચકમિત્રો,  હું, ઉમાકાંત સુથાર, વ્યવસાયે એક સિવિલ એન્જિનિયર અને હૃદયથી એક નવોદિત લેખક, મારી પ્રથમ લઘુ નવલકથા "પડછાયો: એક પેઢીના...

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જ્યાં સ્મૃતિઓ જીતી… સંબંધ હારી ગયો By Navneet Marvaniya

ગાંધીનગરના એક શાંત વિસ્તારમાં “પરફેક્ટ ફ્રેમ સ્ટુડિયો” નામનો નાનો પણ વિશ્વાસપાત્ર ફોટોગ્રાફી સ્ટુડિયો હતો. સ્ટુડિયોની અંદર કેમેરાની ક્લિક સાથે નાજુક યાદોની ફ્લેશના પડછાયા પડ્યા કરત...

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Sugar Mommy By kalpita

“आपका फॉर्म ठीक से भरा नहीं है, मैम।”“ओह, सॉरी... मैं पहली बार जिम जॉइन कर रही हूँ, थोड़ा घबरा रही हूँ।”रिसेप्शन पर खड़ा लड़का मुस्कुराया। “कोई बात नहीं, मैं मदद कर देता हूँ। मैं र...

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ಫೇಕ್ ಪ್ರೇಮಿ By Saandeep Joshi

ಫೇಕ್ ಪ್ರೇಮಿಯ ನಾಟಕ ಎಷ್ಟು ಬಣ್ಣದಿಂದ ಕೂಡಿರುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತಿಳಿಯುವ ಇಚ್ಚೆ ಇದೆಯೇ?

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తల్లి ప్రేమ By kvlsandhyarani

యశోద తొమ్మిది నెలల నిండు గర్భిణిగా ఉన్నప్పుడు మూడు అంతస్తులు ఎక్కి ఏపీ స్లట్ పరీక్ష రాసి పాస్ అయ్యింది .తర్వాత డెలివరీ కి , పుట్టింటికి వెళ్లి , ఒక అబ్బాయికి జన్మనిచ్చింది.       ...

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रंग चुराने वाले बादल By Piyu soul

कहानी: “रंग चुराने वाला बादल”एकबार की बात है, एक छोटा सा गाँव था—सतरंगीपुर इस गाँव की खास बात थी कि यहाँ हर चीज़ रंग-बिरंगी थी। पेड़ नीले, फूल सुनहरे, और आसमान कभी गुलाबी तो कभी बै...

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चमत्कार By Trupti Deo

“चमत्काराच्या शोधात हरवलेला समाज — भोंदू बाबांचा वाढता कहर”आज आपण प्रगतीच्या युगात जगतोय असं आपण अभिमानाने म्हणतो… मोबाईल, इंटरनेट, विज्ञान, शिक्षण — सगळं आपल्या हातात आलंय. पण या...

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बरगद की छाया By prem chand hembram

बरगद की छायाहरखू जन्म से ऐसा न था।उसका दिमाग एकदम साफ और संतुलित था—मानो किसी कुशल कारीगर ने हर नट-बोल्ट कसकर लगाया हो।पर एक दिन दिहाड़ी मजदूरी करते समय मचान पर काम करते हुए अचानक...

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પુરુષ: જવાબદારીઓનો એક અજાણ્યો કિનારો By Miss Chhoti

પુરુષ: જવાબદારીઓનો એક અજાણ્યો કિનારો"પુરુષ હોવું એટલે માત્ર શારીરિક શક્તિ નહીં, પણ જવાબદારીઓના પહાડને હસતા મુખે ઉપાડવો એ છે. સમાજની વણલખી વ્યાખ્યાઓ વચ્ચે દબાઈ જતી પુરુષની સંવેદનાઓ,...

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थंड झाल्यार खावचा - भाग 7 By Prof Shriram V Kale

                 थंड झाल्यार खावचा   अंतिम भाग ७   भगवान  जेवायला लागल्यावर   शेठाणीच्या उशा जवळचा माल आपण  कसा आणला ते  बैजंतीने सांगितलं.  तिच्या उशाशी  दोन बोचकी आहेत  ही  गोष्ट...

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अम्मा - 2 By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा -२ मेरे सामने ' वाले घर से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। सुबह - सुबह सामने घर में कौन लड़ रहा है।घर जाना उचित न समझा अभी तो इस घर में खुशिया मनायी जा रही थी। घर मे नय...

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प्रकृति का महत्व और पिपलांत्री गांव की प्रेरणादायक कहानी By Gauri Katiyar

संस्कृत श्लोक :तरु-लतानां विविध-वर्गाः शं दधाने।सर्वमास्ते जन-हितार्थं संहतम्।वन्य-सम्पद् रक्षणीया सन्ततम्।शाश्वतम्, प्रकृति-मानव-सङ्गतम्।।अर्थ : ये सुंदर-सुंदर लताएँ और ये सुंदर-स...

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ममता की मिसाल सिंधूताई सपकाल By Gauri Katiyar

"अगर मन में सेवा और करुणा की भावना हो, तो एक इंसान हजारों जिंदगियों को बदल सकता है।"भारत की महान सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत थीं, जिन्होंने अपने जी...

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पर्दे के पीछे - 6 By ARTI MEENA

दादा जी ने डॉक्टर की बात सुनकर आश्चर्य से पूछा,“ऐसा क्या हो गया डॉक्टर साहब, जो आपको इतनी रात को आना पड़ा?”डॉक्टर कुछ क्षण चुप रहा।फिर वह धीरे से दादा जी के पास आया और उनके कान के...

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