Best women focused in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

લહેર - 1
by Rashmi Rathod

ટીંગ.... ટીંગ.....  ડોરબેલ વાગતા જ લહેર ઉતાવળે શાક સમારવાનુ પડતુ મુકી ચપ્પુ હાથમાજ લઇ બારણુ ખોલવા દોડી... બારણુ ખોલ્યુ તો કુરીયરમેન.... મેડમ આ તમારા ડોકયુમેન્ટ છે અહી તમારી સહી ...

आघात - 20
by Dr kavita Tyagi
  • 48

आघात डॉ. कविता त्यागी 20 समय का चक्र अपनी गति से आगे बढ़ रहा था। ज्यों-ज्यों पूजा का प्रसव-काल निकट आ रहा था, त्यों-त्यों कौशिक जी की चिन्ता बढ़ती ...

खेल ----आखिर कब तक ? - 2 - अंतिम भाग
by Vandana Gupta
  • 40

खेल ----आखिर कब तक ? (2) सुनते ही आरती की छठी इंद्रिय सचेत हो उठी, एक तिलमिलाहट ने उसके अन्तस को झकझोर दिया, एक साया सा उसकी आँखों के ...

खेल ----आखिर कब तक ? - 1
by Vandana Gupta
  • 98

खेल ----आखिर कब तक ? (1) मन की उद्वेलना हमेशा शब्दों की मोहताज नहीं होती । होती है कोई कोई ऐसी उद्वेलना जिसके बीज मिट्टी में डले तो होते ...

आघात - 19
by Dr kavita Tyagi
  • 150

आघात डॉ. कविता त्यागी 19 बेटी की माँ बनने की पूजा की अभिलाषा को रणवीर तथा उसकी सास नकारात्मक दृष्टिकोण से ग्रहण करते हुए पूजा पर आरोप लगाने लगे ...

કુંપણ - 3
by Zalak bhatt
  • 102

       તેઓ સોફા પર બેસે છે અને ત્યારે અરુણ ભાઈ ખુશી કારણ કહે છે કે આજે આપણી કંપની ને એક નવો કોન્ટ્રાકટ મળ્યો છે અને તેમણે એડવાન્સ ...

ચાવીનો ગુચ્છો
by AJ Maker
  • 244

ચાવીનો ગુચ્છો“તમારી સામે તો વાત જ કરવી બેકાર છે. તમને શું ખબર કે એક સ્ત્રીને ઘરની ચાવી સંભાળવા મળે એ કેટલો મોટો મોભો કહેવાય. મારી બધીજ ફ્રેન્ડસ કિટીપાર્ટીમાં કમરમાં ...

आघात - 18
by Dr kavita Tyagi
  • 194

आघात डॉ. कविता त्यागी 18 पूजा को ससुराल गये पाँच महीने बीत चुके थे। इस समयान्तराल में उसने मात्र दो पत्र अपनी कुशलता की सूचना देने के लिए भेजे ...

आधा मुद्दा (सबसे बड़ा मुद्दा) -अध्याय-15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25
by DILIP UTTAM
  • 32

-----अध्याय १५."केवल नौकरानी नहीं |"-----   शादी बाद आज भी अधिकतर नारी को नौकरानी ही बनना पड़ता है क्यों? ------- हर स्त्री जो बीमार होते हुए बेटा या पति ...

आघात - 17
by Dr kavita Tyagi
  • 194

आघात डॉ. कविता त्यागी 17 पूजा सोचने लगी - माँ की कहानियाँ स्त्री को अबला बनाती हैं और उसको व्यवस्था से सामंजस्य करना सिखाती हैं ! वे कहानियाँ स्त्री ...

बेनाम आशिक।
by सुप्रिया सिंह
  • 188

जिंदगी के ५०बे वसंत पार कर चुकी मैं यानी सुलभा ...जिंदगी कट रही थी । एक रूटीन में होता है न हम औरतो में ..बंध जाता है मन ..सुबह ...

भेड़िये
by Roop Singh Chandel
  • 188

भेड़िये ठंड कुछ बढ़ गई थी. बौखलाई-सी हवा हू-हू करती हुई चल रही थी. उसने शरीर पर झीनी धोती के ऊपर एक पुरानी चादर लपेट रखी थी, लेकिन रह-रहकर ...

એક વણઝારણ
by Author Vaghela Arvind Bharat Bhai
  • 214

રાત્રીના ૧૨: ૪૫ જેટલા વાગ્યાં હતાં. બસ ધીમે ધીમે અમારાં ઘર તરફ જઈ રહી હતી. બસની અંદર ખાખી કપડામાં મારાથી આગળની ચાર પછીની સીટ પર બેઠેલાં કંડકટર સાહેબ ક્યારના ...

आघात - 16
by Dr kavita Tyagi
  • 160

आघात डॉ. कविता त्यागी 16 शीघ्र ही ऐसा अवसर मिल गया जब पूजा और प्रेरणा दोनों एकान्त में बैठकर घंटों तक बातें कर सकती थी । उसने पूजा से ...

साक्षात्कार - 2 - अंतिम भाग
by Neelam Kulshreshtha
  • 276

साक्षात्कार नीलम कुलश्रेष्ठ (2) उसे अपनी एक मित्र सिन्धु से जानकारी है जो इनके यहाँ काम कर चुकी है कि हर पाँचवें छठे महीने इनका विदेश टूर लगता रहता ...

કુંપણ - 2
by Zalak bhatt
  • 170

                                        ધૈવત ના મુખે થી વૈભવ ની આવી બધી વાતો સાંભળી ને ...

થપ્પડ - ભાગ ૧
by Komal Mehta
  • 238

?થપ્પડ નો પ્રોમો જોયો તો , ઘણી આપણી આસપાસ બનેલી ઘટનાં પર થોડું ધ્યાન દોરાયું.? ?સ્ત્રી ને બહું જ સરસ રીતે નાનપણથી સમજાવવામાં આવે કે બેટા તારું ઘર તારું ...

जहां लौट नहीं सकते
by Jaishree Roy
  • 198

जहां लौट नहीं सकते पारे की चमकीली बूंदों की तरह सुबह की धूप छत की मुंडेर पर बिखरी है। सर्दी की एक खूब उजली, धुली सुबह! देखते हुये वह ...

आघात - 15
by Dr kavita Tyagi
  • 282

आघात डॉ. कविता त्यागी 15 समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहा और पूजा के तीन वर्ष सुख-शान्ति से व्यतीत हो गये । वह अपना सारा समय अपने बेटे ...

लव योर सेल्फ मम्मा
by Dr Vinita Rahurikar
  • 254

लव योर सेल्फ मम्मा किचन में मीनू के लिए मठरियाँ तलती अनुभा की आँखें बार-बार भर आ रही थीं. लेकिन मीनू के आसपास मंडराते रहने के कारण वह अपने ...

आघात - 14
by Dr kavita Tyagi
  • 230

आघात डॉ. कविता त्यागी 14 चार-पाँच महीने पश्चात् एक दिन एक अप्रत्याशित घटना घटी । उस दिन अचानक किसी पूर्व सूचना के बिना पूजा और रणवीर घर पर आ ...

नीला आकाश - 3 - अंतिम भाग
by Niraj Sharma
  • 182

नीला आकाश (3) "तुझे नहीं लगता, तू एक ऐसी लड़की से प्यार करने लगा है जिसे न समाज न तेरे घरवाले कभी अपनायेंगे, ऐसा कर कुछ दिन उधर की ...

आघात - 13
by Dr kavita Tyagi
  • 302

आघात डॉ. कविता त्यागी 13 वहाँ से लौटकर तीन-चार दिन तक कौशिक जी का चित्त बहुत ही अशान्त रहा । अपनी इस आन्तरिक अशान्ति से उनका व्यवहार भी असामान्य- ...

કમાણી_રૂપિયાની નહીં #આત્મવિશ્વાસ ની
by Matangi Mankad Oza
  • 216

# ..લગ્નના ૩૦ વર્ષે જ્યારે પતિ પાસે ખર્ચ માટે હાથ લંબાવવો પડે ત્યારે સ્વમાન ઘવાય તો ખરું. આવું જ બીજું વાક્ય સાંભળેલ કે કાશ જે તે સમયે હું મારા ...

साक्षात्कार - 1
by Neelam Kulshreshtha
  • 360

साक्षात्कार नीलम कुलश्रेष्ठ (1) मन में वही तड़प उठ खड़ी हुई है, उसकी कलम की रगें फड़कने लगीं है -उस अनूठे कलात्मक सौंदर्य को समेटने के लिए. शायद इसे ...

रखमा... (जागतिक महिला दिनानिमित्त)
by siddhi chavan
  • 226

' साथीच्या रोगान विठोबाचे निधन झाले आणि सगळ्या जबाबदार्या, सगळ्या कर्तव्यांच ओझ रखमावर पडलं. ४-५ वर्षाचा म्हादु आणि ६-७ वर्षाची गंगी ही दोन मुले... त्यांच्या शाळेची, पोटा-पाण्याची ही सगळी ...

કુંપણ - 1
by Zalak bhatt
  • 342

          (   કુંપણ  )(આ સત્ય ઘટના ને થોડી કાલ્પનિક બનાવી છે,b.b.c માં મહારાષ્ટ્ર ના જલગાંવ શહેર માં થતાં એબોર્સન ને ધ્યાન માં લઈને સ્ટોરી ની ...

यादें - (पुरानी यादों का दर्द) - 2
by Uday Veer
  • 128

कुछ धटनाऐ अचानक से धटित हो जाती है जिनके बारे मे हमने सोचा भी नहीं होता ऐसी ही एक धटना आपके लिए लेकर आ रहा हूँ जो कि बिलकुल ...

आघात - 12
by Dr kavita Tyagi
  • 228

आघात डॉ. कविता त्यागी 12 पिता के शब्दों का अवलम्ब ग्रहण करके पूजा कुछ प्रकृतिस्थ हो गयी और ससुराल जाने के लिए तैयार होने लगी । यह जानते हुए ...

भेड़ियों का पोशम्पा
by Seema Sharma
  • (23)
  • 1.6k

भेड़ियों का पोशम्पा सीमा शर्मा भेड़ियों का झुंड दनदनाता हुआ आया और लाश के चारों ओर गोल-गोल चक्कर काटने लगा। उनमें से एक ने लाश को सूँघा। अचानक उसने ...