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मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(७)
by Saroj Verma
  • 1.1k

जमींदार प्रभातसिंह की बात सुनकर अजीजन बोली.... काश,आपकी तरह दुनिया का हर मर्द  हम औरतों की इज्जत करता होता तो दुनिया में औरतों की ये दशा ना होती,जमींदार साहब! ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(६)
by Saroj Verma
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पहले तो उपेन्द्र ने बाहर खूब शराब की और घर आकर  महुआ से ये कहा.... तुम कमाती हो तो जब चाहो मनमानी करोगी,तुमने जमींदार साहब से पलाश को बोर्डिंग ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(५)
by Saroj Verma
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उपेन्द्र बिना देर किए हुए दोनों बेटियों को संगीत कला केन्द्र में प्रभातसिंह के साथ भरती करवाने ले गया,प्रभातसिंह की चचेरी बहन ही  संगीत कला केन्द्र को चलातीं थीं ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(४)
by Saroj Verma
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इसके बाद फिर कभी भी उपेन्द्र ने मोतीबाई पर शक़ नहीं किया,उसे प्रभातसिंह की बात अच्छी तरह समझ में आ गई थी कि प्रेम उथला नही गहरा होना चाहिए,अब ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(३)
by Saroj Verma
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कुछ ही दिनों में मोतीबाई उस कोठे की सबसे मशहूर तवायफ़ बन गई,अपनी गायकी और नाच से वो सबकी दिलअजीज बन गई,उसकी आवाज़ का जादू अच्छे अच्छो का मन ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(२)
by Saroj Verma
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कमरें में बंद महुआ दिनभर रोती रहीं,शाम होने को आई लेकिन मधुबनी ने दरवाजा नहीं खोला,रात भी हो गई और रात को मधुबनी ने महुआ को ना खाना दिया और ...

मोतीबाई--(एक तवायफ़ माँ की कहानी)--भाग(१)
by Saroj Verma
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"माँ"  मेरे हिसाब से ये एक ही ऐसा शब्द है,जिस पर दुनिया टिकी हुई है,मानव इतिहास के जन्म के समय से ही स्त्री माँ बनती आई है और मातृत्व ...

भावनांचा खून
by सागर भालेकर
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भावनांचा खून                साधारण ३० वर्षांपुवीची गोष्ट. केरळ मध्ये ख्रिस्ती धर्माचा प्रसार आपले पाय झपाटयाने रोवत होता. त्यातच केरळची राजधानी कोचीन येथे एक ...

तपस्या--एक सुहागन की....
by Saroj Verma
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नीरजा ने अपनी सामने वाली पड़ोसन के दरवाजे पर लगी घंटी बजाई..... पड़ोसन ने दरवाज़ा खोला और मुस्कुरा दी फिर बोली.... अरे! आप अन्दर आइए ना! जी! अभी टाइम ...

મારે શું?
by Bhanuben Prajapati
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    શું!!!  આ. બધું મારે એકલી ને કામ કરવાનું છે..હું એકલી થોડી આ ઘરમાં રહુ છું.મોટા મહારાણી તો નીકળી પડ્યાછે. પાકીટ ભરાવીને...બધા ઢસરડા મારે જ  કરવાના..હું તો આ બેસી ...

सास-बहू...एक रिश्ता उलझा सा। - 3 - अंतिम भाग
by निशा शर्मा
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तुम्हें सासू माँ से ऐसा नहीं कहना चाहिए था ! आखिर क्या जरूरत थी तुम्हें बोलने की ? वो तो मुझे सुना रही थीं और मैं सुन रही थी ...

મારું ઘર
by Om Guru
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મારું ઘર                 હું પૂર્વી આજે કેટલાય વર્ષો પછી અતીતની જૂની યાદોને ફંફોસવા બેઠી છું..... મધ્યમ વર્ગીય પરિવારમાં જન્મેલી હું... મને બરાબર યાદ છે વતનનું અમારું એ નાનકડું એવું ...

સેવાના પર્યાય: ડો.ઇલાબહેન ભટ્ટ
by Jagruti Vakil
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સેવાના પર્યાય ડો.ઇલાબેન ભટ્ટ               “દરેક કામમાં જોખમો તો હોય જ છે, દરેક સફળતાની અંદર નિષ્ફળતાનું બીજ હોય જ છે,પણ તે અગત્યનું નથી, તમે તેની સાથે શી રીતે તાલ મિલવો છો તે જ ખરું આહ્વાન છે.” આ શબ્દો છે સેવાના પર્યાય તરીકે ...

माँ को लिखा एक ख़त
by Neelima Sharrma Nivia
  • 1.1k

माँ!!!  तुम्हे तो पता भी नही होगा आज माँ-दिवस हैं  .जब सुबह बहुए आकर पैर छू  कर कहेगी मम्मी  हैप्पी मदर डे  तब तुम मुस्स्कुराकर कहोगी  तुम को   भी ... ...

कैसे लिखूँ उजली कहानी
by Ranjana Jaiswal
  • 1.2k

मुझे माफ करना इला , मैं तुम्हारा साथ न दे सकी । चाहती थी देना ....बहुत….बहुत दूर तक साथ देना पर ... मैंने खुद भी तुम्हें गलत कहा, बुरा ...

નિરાલી
by Bhanuben Prajapati
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  ઘણી વખત જીંદગી માં એવી પળ આવી જાય છે કે, માણસ પોતે ખૂબ થાકી જાય છે. જ્યારે પણ બેમાંથી  એક રાહ ને નક્કી કરવાની હોય છે.ત્યારે તો ખૂબ ...

वीरा हमारी बहादुर मुखिया - 2
by Pooja Singh
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"हम आपको सब से मिलवाते है ........पहले इनसे मिलिए ये है हमारे मेयर जी हममे सबसे बहादुर ...पर गांव के दुश्मनो ने इन्हे आज इस हाल में पहुंचा दिया ...

सास-बहू...एक रिश्ता उलझा सा। - 2
by निशा शर्मा
  • 1.5k

"अरे भाई आज कोई उठेगा भी या नहीं ? अरे ! सूरज देखो कहाँ चढ़ गया है और आज तो मेरा बेटा बेचारा बिना कुछ खाए पिए ही ऑफिस ...

कैसे कैसे दुष्चक्र
by Ranjana Jaiswal
  • 1.1k

मालती देवी इतना तो जानती थीं कि स्त्री के लिए किसी न किसी मर्द का संरक्षण जरूरी होता है ,पर इस संरक्षण की इतनी बड़ी कीमत देनी पड़ती है ...

કમળા કાકી
by Om Guru
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કમળા કાકી આ વાત 1980ના સાલની છે.   દીપેશે કોલેજ પૂરી છ મહિના સુધી અમદાવાદમાં નોકરીની શોધ કરી હતી.  છતાં તેને નોકરી ન મળતા પોતાના ગામ ચાણસ્મા પાછો ફર્યો ...

राधिका
by Vaishnavi mokase
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सकाळपासूनच राधिकाच्या डोक्यात विचारांचे चक्र सुरू होते. संपूर्ण रात्र ती वेदनेने विव्हळत होती. आजपर्यंत इतके रडून रडून आता तिच्या डोळ्यातले अश्रू देखील संपले होते. रात्री खूप उशिरा शरीराच्या आणि ...