Best Women Focused Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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  • दो पतियों की लाडली पत्नी - 24

    Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहल...

  • तपती दोपहरी

    तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बा...

  • ममता ...एक अनुभूति... - 5

    थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई...

जंगल - 38 By Neeraj Sharma

--------------उलझन (3) जगल पस्तक मे दर्ज किया गया है... जो ये जानता है कि रास्ते खुद बे खुद बन जाते है। फिर काफ़ले निकल पड़ते है।                         जैसे साप दृष्टि मित्र  झपकनी...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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पंछी का पिंजरा - भाग 1 By Anil Kundal

हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की  कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी  कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती  थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા - 6 By Komal L

Chapter 6 social media નો દુરુપયોગ કરતી સ્ત્રીઓસોશિયલ મીડિયા આજે સ્ત્રીઓ માટે સૌથી મોટું સશક્તિકરણનુંસાધન છે, પરંતુ તે જ સમયે તેનો દુરુપયોગ પણ સ્ત્રીઓ જ કરી રહી છે – અને તેનુંપ્રમા...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ભૂલ છે કે નહીં ? - ભાગ 106 By Mir

મેં મારી મહેનત વધારી દીધી. દિકરા દિકરી માટે. આમ પણ મારે ઘરમાં કંઈ કરવાનું હતું નહીં કારણ કે મમ્મીને બધું જાતે જ કરવા જોઈતું. મારે ફક્ત ભાખરી કરવાની હોય એ તો આપણા જમવાના સમયે હું કર...

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श्रद्धांजली By Trupti Deo

“त्या चार वर्षांच्या चिमुकलीसाठी…”आज शब्दही थरथरतात… कारण ही फक्त एक बातमी नाही, ही एका निष्पाप जीवाची निःशब्द किंकाळी आहे. चार वर्षांची ती मुलगी… जिने अजून आयुष्याच्या पानांवर पहि...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 17 By Sonam Brijwasi

कार्तिकेय की गाड़ी मंदिर के पास रुकी।नरास्ते पर खड़ा एक गुंडा था, हाथ में बंदूक थामे। पंडित की कनपटी पर बंदूक लगाई गई थी।गुंडा (धीरे, धमकी भरे स्वर में) बोला - जैसा जैसा बोला है वै...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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આહુતિ ની પરાકાષ્ઠા By Urmi Sonagara

આ એવી આહુતિ છે જેમાં બધું હોમાય તો જાય અને પછી ધુવાડો થાય તો પણ છેલ્લે આહુતિ નો જ દોષ કાઢવામાં આવે છે , એવું વક્તિવ જેના વગર આ સૃષ્ટી આધુરી છે .એક સ્ત્રી જેને તેની આખી જિંદગી માં મ...

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ગુજરાતી લોકગીત - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

લોકગીત 1 નણદલ માગે લહેરિયું.મારા લહેરિયામાં લાગી લુંટાલૂટ હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!મારા દાદાનું દીધેલું લહેરિયું રે બાઈ। મારી માતાની બાંધેલ લાંક હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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त्रिशा... - 46 By palvisha

धीरे धीरे ऐसे ही चार साल बीत गए। इन चार सालों में राजन और त्रिशा के जीवन में बहुत कुछ बदला। जैसे त्रिशा अब अपनी बेटी के लिए जीने मारने लगी थी और राजन की आदत दिन पर दिन उसका जीवन दु...

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त्या तिघीजणी (गूढ कथा) By Balkrishna Rane

त्या तिघीजणी - ( विलक्षण गूढ कथा)      मी माझ्या पुरातन वस्तूंच्या संग्रहालयात बसलो होतो.मी पुरातत्व विभागाची पदवी घेतली आहे.इतिहास संशोधनाची आवड मला कधीच स्वस्थ बसू देत नाही.मी वे...

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मुजरिम By कमल चोपड़ा

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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पति परमेश्वर ऐप। By Jeetendra

आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने चाँद पर बसने के रास्ते खोज लिए हैं। इंसान ने ऐसी मशीनें बना ली हैं जो पलक झपकते ही सारा काम कर देती हैं। लेकिन भारतीय पति के दिमाग को समझ...

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संस्कारों की डिग्री। By Jeetendra

शहर के मुख्य चौराहे पर एक बहुत बड़ा होर्डिंग लगा था। उस पर लिखा था कि अब लड़कियों को भटकने की जरूरत नहीं है। परम पावन भारतीय संस्कार यूनिवर्सिटी खुल चुकी है। यहाँ डिग्री केवल पढ़ाई की...

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भारतीय नारी : सृष्टि की उद्घाता By prem chand hembram

भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया गया है।जिस प्रकार यह धरती सम्पूर्ण सृष्टि की जननी है, उसी प्रकार एक...

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लड़की की लिमिट। By Jeetendra

हमारे मोहल्ले में हर घर के दरवाजे पर एक अदृश्य लक्ष्मण रेखा खिंची होती है। इसे सिर्फ लड़कियां ही देख पाती हैं। दयाशंकर जी इस रेखा के सबसे बड़े और निष्ठावान चौकीदार हैं। उनकी बेटी ग...

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टूटा-सा कोई दरवाजा By कमल चोपड़ा

​टूटा-सा कोई दरवाजा​रात काफी हो गयी थी। आसपास की झुग्गियों से खड़कते हुए बरतनों, बिलबिलाते हुए बच्चों, कलपती हुई बुढ़ियों, खाँसते-खँखारते हुए बूढ़ों, झींकती हुई स्त्रियों और शराब के...

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Between truth and lies By Alok Mishra

       Between Truth and LiesUma was married, around thirty-eight years old. A free-spirited woman. Her husband worked out of town and visited only occasionally each month. In trut...

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जंगल - 38 By Neeraj Sharma

--------------उलझन (3) जगल पस्तक मे दर्ज किया गया है... जो ये जानता है कि रास्ते खुद बे खुद बन जाते है। फिर काफ़ले निकल पड़ते है।                         जैसे साप दृष्टि मित्र  झपकनी...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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पंछी का पिंजरा - भाग 1 By Anil Kundal

हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की  कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी  कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती  थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા - 6 By Komal L

Chapter 6 social media નો દુરુપયોગ કરતી સ્ત્રીઓસોશિયલ મીડિયા આજે સ્ત્રીઓ માટે સૌથી મોટું સશક્તિકરણનુંસાધન છે, પરંતુ તે જ સમયે તેનો દુરુપયોગ પણ સ્ત્રીઓ જ કરી રહી છે – અને તેનુંપ્રમા...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ભૂલ છે કે નહીં ? - ભાગ 106 By Mir

મેં મારી મહેનત વધારી દીધી. દિકરા દિકરી માટે. આમ પણ મારે ઘરમાં કંઈ કરવાનું હતું નહીં કારણ કે મમ્મીને બધું જાતે જ કરવા જોઈતું. મારે ફક્ત ભાખરી કરવાની હોય એ તો આપણા જમવાના સમયે હું કર...

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श्रद्धांजली By Trupti Deo

“त्या चार वर्षांच्या चिमुकलीसाठी…”आज शब्दही थरथरतात… कारण ही फक्त एक बातमी नाही, ही एका निष्पाप जीवाची निःशब्द किंकाळी आहे. चार वर्षांची ती मुलगी… जिने अजून आयुष्याच्या पानांवर पहि...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 17 By Sonam Brijwasi

कार्तिकेय की गाड़ी मंदिर के पास रुकी।नरास्ते पर खड़ा एक गुंडा था, हाथ में बंदूक थामे। पंडित की कनपटी पर बंदूक लगाई गई थी।गुंडा (धीरे, धमकी भरे स्वर में) बोला - जैसा जैसा बोला है वै...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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આહુતિ ની પરાકાષ્ઠા By Urmi Sonagara

આ એવી આહુતિ છે જેમાં બધું હોમાય તો જાય અને પછી ધુવાડો થાય તો પણ છેલ્લે આહુતિ નો જ દોષ કાઢવામાં આવે છે , એવું વક્તિવ જેના વગર આ સૃષ્ટી આધુરી છે .એક સ્ત્રી જેને તેની આખી જિંદગી માં મ...

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ગુજરાતી લોકગીત - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

લોકગીત 1 નણદલ માગે લહેરિયું.મારા લહેરિયામાં લાગી લુંટાલૂટ હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!મારા દાદાનું દીધેલું લહેરિયું રે બાઈ। મારી માતાની બાંધેલ લાંક હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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त्रिशा... - 46 By palvisha

धीरे धीरे ऐसे ही चार साल बीत गए। इन चार सालों में राजन और त्रिशा के जीवन में बहुत कुछ बदला। जैसे त्रिशा अब अपनी बेटी के लिए जीने मारने लगी थी और राजन की आदत दिन पर दिन उसका जीवन दु...

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त्या तिघीजणी - ( विलक्षण गूढ कथा)      मी माझ्या पुरातन वस्तूंच्या संग्रहालयात बसलो होतो.मी पुरातत्व विभागाची पदवी घेतली आहे.इतिहास संशोधनाची आवड मला कधीच स्वस्थ बसू देत नाही.मी वे...

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मुजरिम By कमल चोपड़ा

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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पति परमेश्वर ऐप। By Jeetendra

आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने चाँद पर बसने के रास्ते खोज लिए हैं। इंसान ने ऐसी मशीनें बना ली हैं जो पलक झपकते ही सारा काम कर देती हैं। लेकिन भारतीय पति के दिमाग को समझ...

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शहर के मुख्य चौराहे पर एक बहुत बड़ा होर्डिंग लगा था। उस पर लिखा था कि अब लड़कियों को भटकने की जरूरत नहीं है। परम पावन भारतीय संस्कार यूनिवर्सिटी खुल चुकी है। यहाँ डिग्री केवल पढ़ाई की...

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भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया गया है।जिस प्रकार यह धरती सम्पूर्ण सृष्टि की जननी है, उसी प्रकार एक...

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लड़की की लिमिट। By Jeetendra

हमारे मोहल्ले में हर घर के दरवाजे पर एक अदृश्य लक्ष्मण रेखा खिंची होती है। इसे सिर्फ लड़कियां ही देख पाती हैं। दयाशंकर जी इस रेखा के सबसे बड़े और निष्ठावान चौकीदार हैं। उनकी बेटी ग...

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टूटा-सा कोई दरवाजा By कमल चोपड़ा

​टूटा-सा कोई दरवाजा​रात काफी हो गयी थी। आसपास की झुग्गियों से खड़कते हुए बरतनों, बिलबिलाते हुए बच्चों, कलपती हुई बुढ़ियों, खाँसते-खँखारते हुए बूढ़ों, झींकती हुई स्त्रियों और शराब के...

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Between truth and lies By Alok Mishra

       Between Truth and LiesUma was married, around thirty-eight years old. A free-spirited woman. Her husband worked out of town and visited only occasionally each month. In trut...

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