हेलो दोस्तों, मेरा नाम विकास भान्ती है । मूल रूप से कानपुर से हूँ पर नौकरी ने सोनीपत, मनेसर, बरेली, अलीगढ, धार, बस्ती, आगरा और अब फिर से बरेली जैसे अलग अलग शहरों में रहने का मौका दिया । जितनी ज्यादा जगहें उतनी अलग अलग संस्कृतियाँ और साथ ही उतना ही ज्यादा अनुभव । मूलतः मुझे सामाजिक कहानियाँ लिखने का शौक है पर प्रतिलिपि ने मुझे पाठकों की पसंद के हिसाब से लिखना सिखाया । कुछ लोग बिलकुल शुद्ध हिंदी लिखने में गर्व अनुमव करते है, मेरा मानना है कि भाषा वो लिखी जाए जो मूरख से मूरख को भी आघात करे ।