16 --- वह वर्ष भी हँसते, खेलते कहाँ उड़नछू हो गया, पता ही तो न चला |पूरे वर्ष बासुदी इसी प्रकार चाय की लारी पर चाय पीती व सबके साथ मिलकर मस्ती करती रहीं| आदमी के भीतर का बच्चा कभी नहीं मरता, सो जाता है |उसे जगा दो तो फिर खिलखिलाने लगता है | यह भी कमाल ही था कि शुरू वाले दिन एक ही बार शुरू-शुरू में मि. बासु वहाँ दिखाई दिए थे फिर कभी दिखाई नहीं दिए |ड्राइवर अंगद जी गाड़ी में जमे रहकर प्रतीक्षा करते -करते स्टीरियिंग पर सिर रखे टूलते रहते