17 --- विद्यापीठ का अनुशासन बहुत कठोर था, वैसे तो छिपकर सभी सब कुछ करते रहते किन्तु खादी पहनने से लेकर, सुबह प्रार्थना सभा में ठीक ग्यारह बजे उपस्थिति लगाना, प्रार्थना करना, उसके बाद किसी न किसी का व्याख्यान सुनते हुए चरखा कातना | इनमें से किसी भी चीज़ में अनुपस्थित होने की कोई गुंजाइश नहीं होती थी | सब अपने-अपने चरखे व बैठने के लिए आसन लेकर जाते और आधा घंटे की प्रार्थना व भाषण के बाद आधा घंटे कताई करते, कभी-कभी व्याख्यान लंबा भी होता पर कताई