23 -- अगले दिन विद्यापीठ जाने पर सबने शीनोदा का चेहरा मुस्कुराता हुआ पाया |उसके चेहरे पर रात की तकलीफ़ की ज़रा सी शिकन तक दिखाई नहीं दे रही थी | बासुदी ने सुना तो बोलीं ; “ए –शीनोदा ! तुमारा अचार–बिचार बिल्कुल बंद –अभी खिचड़ी, छाछ खाओ ---”उन्होंने रौब मारने की कोशिश की | अब तक तो ग्रुप का जापानी बाबा भी पक्का हो गया था | “अचार के बिना खाना -----ओह ! टौर्चर ----” मुस्कुराते हुए बोला शीनोदा | “और तुम जे इन लोकों को टौर्चर किया -----” बासु दी भी मुस्कुराईं |