प्रेम न हाट बिकाय - भाग 28

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28—     उन दिनों विवेक व अनामिका एक घर की तलाश में थे | फूल-पौधों को प्यार करने वाले विवेक को बगीचे का बड़ा शौक था | उनके पैतृक घर देहरादून में खूब बड़ा बगीचा था | केले के पेड़ लगे थे और अनामिका ने केले के दहीबड़े वहीं के पेड़ों के केलों से बने हुए खाए थे जो उसकी छोटी नन्द ने बगीचे के पीछे के भाग में लगे केले के पेड़ से  बड़ा सा चरखा(गुच्छा) तुड़वाकर सबके लिए बनाए थे |तब अनामिका को पता चला था कि केलों के बहुत से उपयोग होते हैं | वरना उसे