30 – सोमवार की शाम को फिर से हाज़िर थे दोनों बंदे ! पता नहीं क्या है इन दोनों में कि चेहरे के हाव-भाव से कुछ पता ही नहीं चलता !आगे बढ़कर पूछना पड़ता है तब भी उत्तर आसानी से कहाँ मिल पाता है !करते रहो प्रतीक्षा ! ‘गुड इवनिंग’ करके दोनों चुप्पी साधे बैठे थे; “क्या हुआ ?कैसा रहा ट्रिप और हाँ, तुम्हारी मुलाक़ात शीनोदा ----?”विवेक ने ही आगे बढ़कर पूछा “ अच्चा है सब ?” शीनोदा के मुख से अभी भी कुछ शब्द फिसल जाते थे लेकिन इतना भी कुछ नहीं था कि समझ में