तेरहवा द्वार

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भाग 1 शापित हवेली रात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे। पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निकाल रही थीं। आसमान में बादल इतने काले थे कि चाँद की रोशनी भी ज़मीन तक नहीं पहुँच पा रही थी। लेकिन उस रात… गाँव के आखिरी छोर पर बनी पुरानी हवेली की तीसरी मंज़िल की एक खिड़की में फिर से रोशनी जली थी। ठीक वैसे ही… जैसे पिछले कई सालों से हर रात जलती थी। “काली हवेली…”

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तेरहवा द्वार - 1

भाग 1शापित हवेलीरात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे।पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निकाल रही थीं। आसमान में बादल इतने काले थे कि चाँद की रोशनी भी ज़मीन तक नहीं पहुँच पा रही थी।लेकिन उस रात…गाँव के आखिरी छोर पर बनी पुरानी हवेली की तीसरी मंज़िल की एक खिड़की में फिर से रोशनी जली थी।ठीक वैसे ही… जैसे पिछले कई सालों से हर रात जलती थी।“काली हवेली…”गाँव वाले आज भी उसका नाम लेते हुए काँप जाते थे।कहते थे — उस ...Read More

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तेरहवा द्वार - 2

भाग 2पहली आवाज़“तुम वापस क्यों आए…?”उस आवाज़ ने जैसे आरव के शरीर का खून जमा दिया।वो तुरंत पलटा।लेकिन पीछे नहीं था।सिर्फ टूटी दीवारें… सीलन की बदबू… और अँधेरा।उसकी साँसें बेकाबू हो चुकी थीं। कैमरा उसके काँपते हाथों में लगातार हिल रहा था। हवेली के अंदर का माहौल इतना भारी था कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था।“क… कौन है?”उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज गई।जवाब में सिर्फ हवा चली।ऊपर कहीं लकड़ी के दरवाज़े के धीरे-धीरे हिलने की आवाज़ आई।चररर…आरव ने खुद को संभालने की कोशिश की।“Calm down… ये सिर्फ हवा है…”लेकिन अंदर कहीं न कहीं उसे महसूस हो ...Read More

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तेरहवा द्वार - 3

भाग 3बंद कमरा“अब तुम वापस नहीं जा सकते…”कैमरे की स्क्रीन पर लिखे वो शब्द देखकर आरव के हाथ सुन्न गए।बारिश लगातार तेज़ होती जा रही थी। आसमान में बिजली चमक रही थी, और हर चमक के साथ हवेली का काला चेहरा कुछ सेकंड के लिए साफ दिखाई देता… फिर दोबारा अंधेरे में गायब हो जाता।आरव की साँसें अभी तक सामान्य नहीं हुई थीं।उसका पूरा शरीर काँप रहा था।“ये… ये कोई prank नहीं था…”उसने काँपती आवाज़ में खुद से कहा।वो किसी तरह उठकर बाइक तक पहुँचा। लेकिन जैसे ही उसने पीछे मुड़कर हवेली की तरफ देखा…तीसरी मंज़िल की उसी खिड़की ...Read More

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तेरहवा द्वार - 4

भाग 4दीवारों का सच“उसने अपने बच्चे को अभी तक नहीं छोड़ा…”आरव की आँखें उस portrait पर जमी रह गईं।हवा और ठंडी हो गई थी। कॉरिडोर की सारी लाइटें धीमे-धीमे टिमटिमा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा हवेली ज़िंदा हो… और उनकी हर हरकत देख रही हो।रोहन काँपती आवाज़ में बोला, “भाई… यहाँ से चलते हैं…”लेकिन आरव जैसे सुन ही नहीं रहा था।उसकी नजर उस औरत की गोद में बैठे बच्चे पर टिक गई थी।बच्चे का चेहरा पूरी तरह काला था।सिर्फ उसकी आँखें दिखाई दे रही थीं।सफेद।बिल्कुल उसी औरत जैसी।तभी…portrait की औरत की मुस्कान धीरे-धीरे बड़ी होने लगी।आरव ...Read More

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तेरहवा द्वार - 5

भाग 5तहखाने का दरवाज़ा“अगर तुम ये पढ़ रहे हो… तो समझ लो — वो तुम्हें चुन चुकी है।”आरव के काँप उठे।डायरी के पन्नों से अजीब सी बदबू आ रही थी… जैसे वो कागज़ नहीं, किसी पुरानी कब्र से निकाली गई चीज़ हो।कमरे के चारों तरफ दीवारों में फँसे चेहरे अभी भी धीरे-धीरे हिल रहे थे।कुछ रो रहे थे… कुछ उसे घूर रहे थे।और उन सबकी आँखों में सिर्फ एक ही चीज़ थी—डर।आरव ने काँपते हाथों से अगला पन्ना खोला।लिखावट बहुत खराब थी। जैसे किसी ने डर के मारे जल्दी-जल्दी लिखा हो।“मेरा नाम देवेंद्र है। मैं इस हवेली का नौकर ...Read More