भाग 2
पहली आवाज़
“तुम वापस क्यों आए…?”
उस आवाज़ ने जैसे आरव के शरीर का खून जमा दिया।
वो तुरंत पलटा।
लेकिन पीछे कोई नहीं था।
सिर्फ टूटी दीवारें… सीलन की बदबू… और अँधेरा।
उसकी साँसें बेकाबू हो चुकी थीं। कैमरा उसके काँपते हाथों में लगातार हिल रहा था। हवेली के अंदर का माहौल इतना भारी था कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था।
“क… कौन है?”
उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज गई।
जवाब में सिर्फ हवा चली।
ऊपर कहीं लकड़ी के दरवाज़े के धीरे-धीरे हिलने की आवाज़ आई।
चररर…
आरव ने खुद को संभालने की कोशिश की।
“Calm down… ये सिर्फ हवा है…”
लेकिन अंदर कहीं न कहीं उसे महसूस हो चुका था — वो हवेली में अकेला नहीं है।
उसने कैमरा अपने चेहरे की तरफ किया।
“Guys… शायद यहाँ कोई है। अगर ये prank है तो honestly… बहुत real लग रहा है।”
बोलते वक्त भी उसकी आवाज़ काँप रही थी।
अचानक कैमरे की flashlight अपने आप बंद हो गई।
पूरा हॉल अँधेरे में डूब गया।
“Shit…”
आरव ने जल्दी-जल्दी कैमरा थपथपाया।
लेकिन flashlight ऑन नहीं हुई।
अब सिर्फ बाहर चमकती बिजली की हल्की रोशनी अंदर आ रही थी।
उसी रोशनी में…
उसे सीढ़ियों के ऊपर कोई खड़ा दिखाई दिया।
एक औरत।
सफेद चेहरा।
लंबे बाल।
और हाथ में लालटेन।
आरव की साँस रुक गई।
वो हिल भी नहीं पा रहा था।
औरत बिल्कुल स्थिर खड़ी थी।
फिर धीरे-धीरे…
उसने अपना सिर टेढ़ा किया।
टक…
जैसे उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई हो।
आरव डर के मारे पीछे हट गया।
“क… कौन हो तुम?”
औरत ने जवाब नहीं दिया।
बस धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी।
छन… छन… छन…
उसकी पायल की आवाज़ पूरे हवेली में गूँज रही थी।
हर कदम के साथ लालटेन की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
और अब…
आरव साफ देख पा रहा था —
उसकी आँखें पूरी सफेद थीं।
उनमें काली पुतलियाँ नहीं थीं।
चेहरे पर जगह-जगह जले हुए निशान थे।
और उसके होंठों से काला खून बह रहा था।
आरव चीख पड़ा।
“दूर रहो!”
वो पीछे हटते हुए दीवार से टकरा गया।
लेकिन अगले ही पल बिजली चमकी…
और औरत गायब हो चुकी थी।
पूरा हॉल फिर खाली था।
आरव तेजी से साँस लेने लगा।
“नहीं… नहीं… मैंने सच में देखा…”
उसी समय उसके कैमरे की flashlight फिर चालू हो गई।
हाथ काँपते हुए उसने सीढ़ियों पर रोशनी डाली।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन सीढ़ियों पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे।
जैसे कोई अभी-अभी वहाँ खड़ा था।
आरव डरते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
हर निशान से मिट्टी और पानी टपक रहा था।
लेकिन सबसे अजीब बात…
वो निशान इंसानी पैरों जैसे नहीं थे।
उँगलियाँ बहुत लंबी थीं।
और एड़ियाँ उल्टी दिशा में मुड़ी हुई थीं।
आरव का गला सूख गया।
तभी ऊपर तीसरी मंज़िल से किसी चीज़ के गिरने की जोरदार आवाज़ आई।
धड़ाम!!!
पूरा हवेली काँप उठी।
आरव डरकर ऊपर देखने लगा।
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर…
किसी लड़की के रोने की आवाज़ आने लगी।
बहुत धीमी।
जैसे कोई दर्द में हो।
“म… मदद करो…”
आरव का दिल तेजी से धड़कने लगा।
उसके अंदर डर था… लेकिन curiosity उससे भी बड़ी हो चुकी थी।
वो धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।
हर कदम पर लकड़ी चरमराती थी।
चरर… चरर…
जैसे सीढ़ियाँ किसी भी वक्त टूट जाएँगी।
तीसरी मंज़िल तक पहुँचते-पहुँचते हवेली की ठंड और बढ़ गई।
इतनी कि उसके हाथ सुन्न होने लगे।
अब रोने की आवाज़ बिल्कुल पास से आ रही थी।
कॉरिडोर लंबा और अँधेरा था।
दोनों तरफ पुराने कमरे।
ज्यादातर दरवाज़े टूटे हुए।
दीवारों पर काली नमी फैली हुई थी।
और हर जगह मकड़ी के जाले।
कॉरिडोर के आखिर में एक कमरा था…
जिसका दरवाज़ा बाकी दरवाज़ों से अलग था।
पुराना काला दरवाज़ा।
उस पर अजीब निशान बने हुए थे।
और नीचे फर्श पर राख फैली हुई थी।
रोने की आवाज़ उसी कमरे से आ रही थी।
आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
जैसे-जैसे वो करीब जा रहा था… उसका सिर भारी होने लगा।
दिल घबराने लगा।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके कान में बहुत धीरे-धीरे फुसफुसा रहा हो।
“भाग जाओ…”
“वो जाग चुकी है…”
“दरवाज़ा मत खोलना…”
आरव ने सिर झटक दिया।
“कोई मुझे डराने की कोशिश कर रहा है…”
लेकिन उसकी टाँगें अब काँप रही थीं।
वो दरवाज़े के सामने पहुँचा।
रोने की आवाज़ अचानक बंद हो गई।
पूरा कॉरिडोर शांत हो गया।
इतना शांत… कि उसकी साँसों की आवाज़ भी डरावनी लग रही थी।
उसने धीरे-धीरे दरवाज़े को छुआ।
बर्फ जैसा ठंडा।
अचानक उसके हाथ पर किसी ने पीछे से पकड़ लिया।
आरव चीख पड़ा।
लेकिन पीछे कोई नहीं था।
उसका हाथ खुद-ब-खुद पीछे खिंच गया था।
जैसे किसी ने रोकने की कोशिश की हो।
उसी समय…
दरवाज़े के अंदर से एक लड़की की आवाज़ आई—
“मुझे बाहर निकालो…”
आरव जम गया।
“क… कौन हो तुम?”
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर अंदर से बहुत धीमी हँसी सुनाई दी।
ही… ही… ही…
वो हँसी इंसानी नहीं थी।
उसमें दर्द भी था… और पागलपन भी।
अचानक दरवाज़े के नीचे से काला पानी बाहर आने लगा।
धीरे-धीरे…
और उसके साथ भयानक बदबू फैलने लगी।
जैसे किसी सड़ी हुई लाश की।
आरव पीछे हट गया।
उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे लगा अभी फट जाएगा।
तभी…
कॉरिडोर के आखिर में किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।
ठक! ठक! ठक!
जैसे कोई चार पैरों पर उसकी तरफ भाग रहा हो।
आरव ने flashlight उस तरफ घुमाई।
और जो उसने देखा…
उसे देखकर उसकी चीख निकल गई।
एक औरत दीवारों पर उल्टी रेंगते हुए उसकी तरफ आ रही थी।
उसके हाथ-पैर टूटे हुए थे।
बाल पूरे चेहरे पर फैले थे।
और उसकी गर्दन पूरी उल्टी दिशा में मुड़ी हुई थी।
लेकिन सबसे डरावनी चीज़…
उसकी सफेद आँखें थीं।
वो इतनी तेजी से उसकी तरफ बढ़ रही थी कि आरव का दिमाग सुन्न हो गया।
वो तुरंत भागा।
सीढ़ियों की तरफ।
पीछे लगातार पायल और रेंगने की आवाज़ें आ रही थीं।
छन! छन! ठक! ठक!
“भागो…”
किसी ने उसके कान में फुसफुसाया।
आरव बिना पीछे देखे भागता रहा।
लेकिन तभी उसका पैर टूटी लकड़ी में फँस गया।
और वो सीढ़ियों से नीचे गिर पड़ा।
धड़ाम!!!
उसके सिर से खून निकलने लगा।
कुछ सेकंड तक उसकी आँखों के सामने अँधेरा छा गया।
जब उसने ऊपर देखा…
वो चीज़ सीढ़ियों के ऊपर खड़ी थी।
स्थिर।
उसके लंबे बाल नीचे लटक रहे थे।
और होंठों पर वही भयानक मुस्कान थी।
धीरे-धीरे उसने अपना हाथ उठाया…
और अपनी लंबी उँगली से नीचे की तरफ इशारा किया।
आरव काँप उठा।
उसने नीचे देखा।
सीढ़ियों के नीचे फर्श पर धूल में कुछ लिखा था।
ताज़ा।
जैसे किसी ने अभी लिखा हो।
“13वाँ दरवाज़ा मत खोलना।”
आरव का पूरा शरीर काँपने लगा।
“13वाँ दरवाज़ा…?”
तभी ऊपर खड़ी औरत अचानक गायब हो गई।
और पूरे हवेली में एक साथ औरतों की चीखें गूँज उठीं।
इतनी तेज़ कि आरव ने अपने कान बंद कर लिए।
“निकल जाओ…”
“भाग जाओ…”
“वो तुम्हें मार देगी…”
आरव किसी तरह उठकर बाहर भागा।
हवेली का मुख्य दरवाज़ा अब अपने आप बंद होने लगा था।
धड़ाम! धड़ाम!
वो पूरी ताकत से दौड़ा।
और आखिरी सेकंड में बाहर निकल गया।
उसके बाहर आते ही हवेली का दरवाज़ा जोर से बंद हो गया।
धड़ाम!!!
पूरा जंगल फिर शांत हो गया।
आरव बारिश में भीगा हुआ ज़मीन पर गिर पड़ा।
उसकी साँसें टूट रही थीं।
चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।
उसने काँपते हाथों से कैमरा उठाया।
लेकिन कैमरे की screen पूरी काली थी।
सिर्फ एक चीज़ दिखाई दे रही थी—
एक लाल रंग का दरवाज़ा।
और उसके ऊपर खून से लिखा था—
“अब तुम वापस नहीं जा सकते…”
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