भाग 11
वापस स्वागत है…
काली हवेली को जले हुए पूरे छह महीने बीत चुके थे।
गाँव धीरे-धीरे फिर सामान्य होने लगा था।
अब लोग रात में बाहर निकलने लगे थे। बच्चे फिर से गलियों में खेलते थे। और हवेली का नाम भी कम लिया जाने लगा था।
सबको लगता था…
श्राप खत्म हो चुका है।
लेकिन आरव अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया था।
उस रात के बाद उसकी जिंदगी बदल गई थी।
वो पहले जैसा हँसता नहीं था।
उसने paranormal videos बनाना भी छोड़ दिया था।
उसका कैमरा अब भी उसके कमरे के कोने में बंद पड़ा था… जिसे उसने उस रात के बाद कभी छुआ तक नहीं।
लेकिन सबसे अजीब बात…
उसे अब भी हर रात एक ही सपना आता था।
एक लंबा अँधेरा कॉरिडोर।
अंत में लाल दरवाज़ा।
और दरवाज़े के पीछे से आती बच्चों की हँसी।
ही… ही… ही…
हर बार सपना वहीं खत्म हो जाता।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से…
सपना बदलने लगा था।
अब उस दरवाज़े के पीछे कोई उसे बुलाता था।
“आरव…”
“वापस आ जाओ…”
उस रात भी आरव अचानक चीखते हुए उठ बैठा।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था।
कमरे की घड़ी में समय था—
3:13
ठीक उसी समय…
उसके कमरे का टीवी अपने आप चालू हो गया।
टक!
स्क्रीन पर सिर्फ काला अँधेरा था।
फिर धीरे-धीरे…
एक वीडियो चलने लगा।
आरव का दिल रुक गया।
वो उसी रात की recording थी।
हवेली वाली।
“नहीं…”
उसने काँपते हुए पीछे हटना चाहा।
लेकिन टीवी अपने आप आवाज़ बढ़ाने लगा।
अब स्क्रीन पर वही लाल कॉरिडोर दिखाई दे रहा था।
और फिर…
वीडियो में कैमरा धीरे-धीरे उस लाल दरवाज़े के पास पहुँचा।
लेकिन इस बार कुछ अलग था।
दरवाज़ा पहले से खुला हुआ था।
अंदर पूरा अँधेरा।
फिर…
वीडियो में किसी के रोने की आवाज़ आई।
बहुत धीमी।
“मदद करो…”
आरव का गला सूख गया।
क्योंकि वो आवाज़…
उसकी अपनी थी।
उसने डरते हुए टीवी की तरफ देखा।
और अगले ही पल…
स्क्रीन पर उसे खुद दिखाई दिया।
वही कपड़े। वही चेहरा।
लेकिन उसकी आँखें पूरी सफेद थीं।
टीवी वाला आरव धीरे-धीरे मुस्कुराया।
फिर उसने स्क्रीन के अंदर से फुसफुसाया—
“तुम अभी तक बाहर नहीं निकले…”
धड़ाम!!!
टीवी अपने आप बंद हो गया।
पूरा कमरा अँधेरे में डूब गया।
आरव की साँसें टूटने लगीं।
“ये… ये सच नहीं है…”
उसी समय…
उसके कमरे के बाहर पायल की आवाज़ सुनाई दी।
छन… छन… छन…
आरव जम गया।
आवाज़ धीरे-धीरे उसके दरवाज़े के पास आकर रुक गई।
फिर…
तीन बार दस्तक हुई।
ठक… ठक… ठक…
उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे लगा अभी फट जाएगा।
और फिर…
बाहर से वही आवाज़ आई।
बहुत धीमी।
बहुत गहरी।
“दरवाज़ा खोलो…”
आरव की आँखों में डर भर गया।
वही आवाज़।
वही… जो पहली रात हवेली में सुनाई दी थी।
कुछ सेकंड तक पूरा सन्नाटा रहा।
फिर अचानक…
दरवाज़े के नीचे से काला पानी अंदर आने लगा।
धीरे-धीरे।
आरव पीछे हट गया।
उसकी साँसें काँप रही थीं।
तभी…
कमरे की दीवारों पर हाथों के निशान बनने लगे।
एक के बाद एक।
गीले। काले।
और फिर…
आईने पर अपने आप कुछ लिखा दिखाई दिया।
“तुमने सोचा… दरवाज़ा बंद हो गया?”
आरव की आँखें फैल गईं।
“नहीं…”
अचानक कमरे का तापमान बहुत गिर गया।
इतना कि उसकी साँसों से धुआँ निकलने लगा।
और तभी…
उसके पीछे किसी के खड़े होने का एहसास हुआ।
बहुत करीब।
धीरे-धीरे उसने पीछे देखा।
और उसकी चीख निकल गई।
वही बच्चा।
लेकिन अब…
वो लगभग इंसान जितना बड़ा हो चुका था।
उसकी सफेद आँखें अँधेरे में चमक रही थीं।
और उसके शरीर पर दरारें थीं… जिनके अंदर गहरा अँधेरा हिल रहा था।
वो मुस्कुराया।
“तुमने सिर्फ मेरा शरीर तोड़ा था…”
“मुझे नहीं।”
आरव पीछे हटते-हटते दीवार से टकरा गया।
“दूर रहो…”
बच्चा धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा।
उसके हर कदम के साथ कमरे की दीवारें काली पड़ती जा रही थीं।
छन… छन… छन…
लेकिन इस बार पायल की आवाज़ बच्चे के पैरों से आ रही थी।
आरव का दिमाग सुन्न हो गया।
“तू चाहता क्या है?!”
बच्चा कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर बहुत धीरे से बोला—
“दरवाज़ा कभी बंद नहीं हुआ था…”
अचानक…
पूरा कमरा काँप उठा।
दीवारें गायब होने लगीं।
फर्श टूटने लगा।
और अगले ही पल…
आरव ने खुद को फिर उसी लंबे कॉरिडोर में खड़ा पाया।
लाल कॉरिडोर।
अंत में वही दरवाज़ा।
13वाँ दरवाज़ा।
उसका दिल रुक गया।
“नहीं…”
उसने पीछे मुड़कर भागना चाहा।
लेकिन पीछे अब कुछ नहीं था।
सिर्फ अंतहीन अँधेरा।
और उसी अँधेरे से हजारों आवाज़ें गूँजने लगीं—
“वो वापस आ गया…”
“द्वार लौट आया…”
“अब वो कभी नहीं जाएगा…”
आरव काँपते हुए पीछे हटने लगा।
लेकिन तभी…
लाल दरवाज़ा धीरे-धीरे अपने आप खुलने लगा।
चरररर…
अंदर पूरा अँधेरा था।
फिर उस अँधेरे में दो विशाल सफेद आँखें खुलीं।
और एक बहुत धीमी हँसी पूरे कॉरिडोर में गूँज गई।
ही… ही… ही…
फिर…
वही आवाज़ आई—
“वापस स्वागत है…”
तो दोस्तों...
13वें दरवाज़े का रहस्य यहीं समाप्त होता है।
लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है...
क्या सच में वो दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो गया?
या फिर कहीं किसी और अंधेरी जगह पर...
वो आज भी किसी के खुलने का इंतज़ार कर रहा है?
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मिलते हैं एक नई कहानी, एक नए रहस्य और एक नए डर के साथ...
तब तक याद रखिए...
हर बंद दरवाज़े के पीछे सिर्फ एक कमरा नहीं होता,
कभी-कभी एक ऐसा अंधेरा भी होता है...
जिसे जागना नहीं चाहिए।
शुभ रात्रि... 👁️🚪