श्री: संघर्ष एवं प्रेम

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ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेकिन पता नहीं कैसे उसका मुंह ठीक था । बोले तो सुंदर था । मुंह देख कर तो कोई कहे नहीं सकता था कि उससे कोई शरीर का रोग भी है ।लेकिन जब कोई हाथ पैर देखता तो सब का मन दुखी हो जाता । सब श्री की चिंता करते । और किस तरह से उसके कुरूप शरीर के बाद भी एक हरि नाम का सुंदर सा लड़का उसे प्यार करेगा

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 1

ये कहानी एक लड़की की है जिसका नाम श्री है ।श्री का पूरा शरीर भले की कुरूप था लेकिन नहीं कैसे उसका मुंह ठीक था । बोले तो सुंदर था । मुंह देख कर तो कोई कहे नहीं सकता था कि उससे कोई शरीर का रोग भी है ।लेकिन जब कोई हाथ पैर देखता तो सब का मन दुखी हो जाता । सब श्री की चिंता करते ।और किस तरह से उसके कुरूप शरीर के बाद भी एक हरि नाम का सुंदर सा लड़का उसे प्यार करेगा .तो ये कहानी तब से शुरू होगी जब श्री अपनी मां की ...Read More

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 2

तो अब अच्छे नंबर 12वीं में आ जाने के बाद, अब श्री ने इग्नू मे एडमिशन ले लिया, आगे पढ़ाई उसने ओपन से की थी, और UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी। हां श्री को अब IAS बनना था दिखाना था सब को कि वो कमजोर नहीं है। उसने अपना स्कूल ख़त्म होने के बाद अपनी मम्मी का एक प्राइमरी स्कूल खुलवाया। ज्यादा तर समय अब श्री अपनी पढ़ाई और भक्ति को देती थी और समय निकाल कर अपनी मम्मी के स्कूल में पढ़ाती भी थी।अपनी मां के विद्यालय में पढ़ाना। अपनी पढ़ाई करना । शाम को ट्यूशन ...Read More

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 3

हरि अब गाड़ी स्टार्ट कर देता है । वो वहां से अपने घर की और गाड़ी घुमा लेता है। रेडियो में गाने चलाता है ।लेकिन श्री रेडियो बंद कर देती है। क्यूंकि श्री भजन के शिवाय किसी प्रकार का गाना पसंद नहीं करती थी।हरि कहता है आपने रेडियो बंद क्यों किया ।श्री ने कहा कि उसे गाने सुनना पसंद नहीं ।हरि बोला तुम कितनी बोरिंग हो ।यार।उसके यार बोलने पर श्री उसे घूरती है और बोलती है कि मैं आपकी कोई यार नहीं हु आगे से मुझे यार मत कहना । समझे। और रही बात की मैं बोरिंग हु ...Read More

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 4

फ्लैश बैक endवर्तमान में ,श्री सीता जी से बात कर रही थी । सीता जी ने श्री से पूछा अब और भी ज्यादा भक्ति करने की क्या आवश्यकता है पिछली बार भी मैने तुम्हे समझाया था फिर फिर भी तुम्हारा ये रूप मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।श्री ने उनकी बात सुन कर कहा। आंटी आप मेरी मां जैसे है । जिस प्रकार वो मुझे समझाती है उसी प्रकार आपने भी मुझे समझाया। मेरे हित चाहने की इच्छा से आपने मुझे ये सब समझाया था। लेकिन मेरे लिए तो मेरा हित बस नारायण भक्ति में ही है ।अब मैने ...Read More

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 5

श्री और हरि आपस में बात कर रहे थे की तभी हरि का फोन बजा वो वहां से चला । श्री ने अपनी दिनचर्या चालू रखते हुए शुर्यनमस्कार(योग) करना प्रारंभ किया । फोन कट होने के बाद हरि दुबारा जब किचेन की तरफ आ रहा था तब वो श्री को योगा करते हुए देख रहा था ।श्री ध्यान लगाने के बाद नित्य ही योगा भी करती थी । ध्यान और योग से श्री का शरीर और भी ज्यादा आकृषित होता जा रहा था । हरि चाह कर भी श्री से अपनी नजर नहीं हटा पा रहा था । श्री ...Read More

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 6

अगले दिन श्री का upsc prelims परीक्षा थी । श्री अपना नित्य कार्य पूर्ण करके ध्यान योग करने के नाश्ते की टेबल पर सबके साथ नाश्ता करने लगी । सीता जी ने श्री से कहा बेटा आज तुम्हारा पेपर है बेस्ट ऑफ लक बेटा prelims में सबसे अच्छे नंबर तुम ही लाओगी मुझे विश्वास है। श्री ने कहा जी आंटी मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि आज की परीक्षा में मैं अपना बेस्ट दूंगी । आप चिंतित न हो । सीता जी ने हरि से कहा बेटा श्री को उसके एग्जाम सेंटर तक पहुंचा देना । ताकि वो लेट न ...Read More