घमंड का नाम अभ्यंकर था। पुणे में उसका नाम सुनते ही लोग फोन काट देते थे। 28 साल का। 6 फुट हाइट। सफेद शर्ट, काली पैंट, आंखों पर महंगा चश्मा। 80 लाख की मर्सिडीज। जेब में 3 फोन। और जुबान पर एक ही लाइन - "मुझे गरीबों से बात करने में एलर्जी है।" अभ्यंकर बिजनेसमैन था, पर बिजनेस से ज्यादा घमंड बेचता था। मीटिंग में अगर कोई लेट आता तो नौकरी से निकाल देता। नौकर अगर पानी लाने में 2 मिनट लेट करता तो गिलास फेंक देता। उसका बाप गरीब था, लोग हंसते थे। तभी से उसने कसम खाई - इतना पैसा कमाऊंगा कि दुनिया मे

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Saarghaa - 1

"ये अधूरे प्यार की कहानी नहीं, ये पूरे नश-ए-इश्क़ की कहानी है।" ******* *हमें तो मोक्ष की चाह थी, प्यार का नशा हुआ कि न प्यार मुकम्मल हुआ, न मोक्ष मुकम्मल हुआ।** घमंड का नाम अभ्यंकर था।पुणे में उसका नाम सुनते ही लोग फोन काट देते थे।28 साल का। 6 फुट हाइट। सफेद शर्ट, काली पैंट, आंखों पर महंगा चश्मा। 80 लाख की मर्सिडीज। जेब में 3 फोन। और जुबान पर एक ही लाइन - "मुझे गरीबों से बात करने में एलर्जी है।"अभ्यंकर बिजनेसमैन था, पर बिजनेस से ज्यादा घमंड बेचता था। मीटिंग में अगर कोई लेट आता तो नौकरी स ...Read More

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Saarghaa - 2

Episode 2 :-ये अधूरे प्यार की कहानी नहीं,ये पूरे नश-ए-इश्क़ की कहानीबाबूजी, घर को इतना मत देखोघर शर्मा जाएगा। आपको नहीं जानती। आप कौन हो?"लड़की की आवाज सुन कर अभ्यंकर थोड़ा सकपका गया। उसने स्टूल पर बैठे-बैठे ही कहा, "मैं अभ्यंकर। पुणे से आ रहा था गाड़ी खराब हो गई।"लड़की ने उसकी तरफ देखा और वो समझने की कोशिश करने लगी इनको जानती थी। उसके चेहरे पर वही अनजान वाला भाव था।"यहाँ रात में कोई नहीं आता बाबूजी।" उसने कहा। "सारघा में रात में कोई दरवाजा नहीं खटखटाता।"अभ्यंकर को बाबूजी शब्द सुन कर अजीब लगा पुणे में उसे कोई ...Read More

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Saarghaa - 3

Episode 3 - जैसे बरसों पुराने दोस्त होंदरवाजे पर जो दस्तक थी, वो अब नहीं थी। बाहर बारिश अब नहीं, बस टप-टप गिर रही थी। जैसे आसमान भी थक गया हो अंदर, मिट्टी के घर में चूल्हे की आंच धीमी हो गई थी। राख में अभी भी हल्की सी गरमाहट थी, लाल-लाल अंगारे चमक रहे थे।अभ्यंकर और सारघा, दोनों जमीन पर ही बैठ गए थे। बीच में दो कुल्हड़ रखे थे, एक आधा खाली, एक पूरा भरा। बहुत देर तक कोई कुछ नहीं बोला। सिर्फ बारिश की आवाज और चूल्हे की चिट-चिट।फिर सारघा ने ही चुप्पी तोड़ी।"आप पुणे में ...Read More

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Saarghaa - 4

Episode:-4 बातें जो दिल तक गईंरात गहरी हो चुकी थी। बाहर बारिश अब तेज़ नहीं थी, बस धीरे-धीरे टपक थी। मिट्टी के घर की छत से पानी टपक कर कोने में रखी बाल्टी में गिर रहा था - टिप-टिप अंदर चूल्हे में आग जल रही थी। उसकी लाल रोशनी में दोनों के चेहरे चमक रहे थे। अभ्यंकर और सारघा, दोनों ज़मीन पर बैठे थे, बीच में दो कुल्हड़ रखे थे, जिनसे हल्का-हल्का धुआँ उठ रहा था बहुत देर तक कोई कुछ नहीं बोला। फिर अभ्यंकर ने ही चुप्पी तोड़ी। आज उसके अंदर कुछ था जो बाहर निकलना चाहता था।"सारघा...""हाँ?""तुम्हें ...Read More