Saarghaa - 2 in Hindi Horror Stories by rakshita pal books and stories PDF | Saarghaa - 2

Featured Books
Categories
Share

Saarghaa - 2


Episode 2   :-ये अधूरे प्यार की कहानी नहीं,
ये पूरे नश-ए-इश्क़ की कहानी  

बाबूजी, घर को इतना मत देखो घर शर्मा जाएगा।  "मैं आपको नहीं जानती। आप कौन हो?"

लड़की की आवाज सुन कर अभ्यंकर थोड़ा सकपका गया। उसने स्टूल पर बैठे-बैठे ही कहा, "मैं अभ्यंकर। पुणे से आ रहा था  गाड़ी खराब हो गई।"

लड़की ने उसकी तरफ देखा और वो समझने की कोशिश करने लगी इनको जानती थी। उसके चेहरे पर वही अनजान वाला भाव था।

"यहाँ रात में कोई नहीं आता बाबूजी।" उसने कहा। "सारघा में रात में कोई दरवाजा नहीं खटखटाता।"

अभ्यंकर को बाबूजी शब्द सुन कर अजीब लगा  पुणे में उसे कोई बाबूजी नहीं कहता था। सब सर कहते थे।

"तो क्या करूँ? बाहर बारिश में भीगता रहूँ?" उसने थोड़े गुस्से में कहा।

लड़की कुछ नहीं बोली वो चूल्हे के पास गई। उसने चूल्हे में दो लकड़ियाँ डाली आग जलने लगी। पूरे घर में धुआं फैल गया  धुएं की महक अजीब थी।

अभ्यंकर बड़े ध्यान से घर को ही देख रहा था वो लड़की को नहीं देख रहा था  उस की नजर बार-बार उस काले धब्बे पर जा रही थी। धब्बा खिड़की के पास था, बड़ा सा, जैसे किसी ने धुएं से कुछ बनाया हो।

लड़की ने एक बर्तन में पानी डाला, चाय की पत्ती डाली। फिर गुड़ डाला।

"चाय पियोगे बाबूजी?" उसने पीछे से पूछा, बिना देखे।

अभ्यंकर ने कहा, "हाँ।"

लड़की ने दो कुल्हड़ निकाले  उसने दोनों में चाय डाली। एक कुल्हड़ अभ्यंकर की तरफ बढ़ाया।

अभ्यंकर ने कुल्हड़ पकड़ा कुल्हड़ गरम था और थोड़ी राहत की सास ली गरमाहट के साथ चाय में से अजीब सी महक आ रही थी, धुएं जैसी।

"तुम यहाँ अकेली रहती हो?" अभ्यंकर ने पूछा।

लड़की ने जवाब नहीं दिया वो दूसरा कुल्हड़ लेकर खिड़की के पास चली गई बाहर देखने लगी। बाहर बारिश में वो खंडहर हवेली दिख रही थी, जिस पर बार-बार बिजली गिर रही थी।

अभ्यंकर ने चाय की सिप ली। चाय बहुत मीठी थी 

"तुम्हारा नाम क्या है?" उसने फिर पूछा।

लड़की ने खिड़की से ही कहा, "नाम मत पूछो बाबूजी। यहाँ नाम बताने से रिश्ता बन जाता है और मैं अनजान लोगों से रिश्ता नहीं बनाती  मैं आपको नहीं जानती।"

अभ्यंकर को उसकी बात अजीब लगी।

"कैसा रिश्ता?"

लड़की पीछे  मुड़ी पहली बार उसने अभ्यंकर को ठीक से देखा। लालटेन की रोशनी में उसका चेहरा साफ दिख रहा था। सादा चेहरा, पर आँखें बहुत तेज।

"इस गांव में जो एक बार चाय पी लेता है, वो यहीं का हो जाता है।" उसने धीरे से कहा।

अभ्यंकर का हाथ कांप गया। कुल्हड़ से थोड़ी चाय जमीन पर गिर गई।

"क्या मतलब?"

लड़की फिर मुस्कुराई हल्की सी मुस्कुराहट।

"मजाक कर रही हूँ बाबूजी डर गए?"

अभ्यंकर ने राहत की सांस ली "तुम मजाक भी करती हो? मुझे लगा तुम बोलती ही नहीं।"

"मैं कम बोलती हूँ" लड़की ने कहा "ज्यादा बोलने से घर में आवाजें गूंजती हैं। और इस घर में पहले से ही बहुत आवाजें हैं।"

अभ्यंकर ने चौंक कर देखा "कौन सी आवाजें?"

लड़की ने कुछ नहीं कहा उसने इशारे से उस काले धब्बे की तरफ दिखाया।

"वो क्या है?" अभ्यंकर ने पूछा।

"पता नहीं" लड़की ने कहा "जब से मैं यहाँ आई हूँ, वो धब्बा वहीं है। कभी-कभी हिलता है।"

अभ्यंकर ने ध्यान से देखा धब्बा सच में हिल रहा था क्या? या ये धुएं की वजह से लग रहा था?

बाहर बारिश और तेज हो गई और तेज हवा चलने लगी। दरवाजा अपने आप हिलने लगा। चरररर की आवाज आने लगी।

लड़की भाग कर गई और दरवाजा बंद कर दिया।

"रात में दरवाजा खुला नहीं रखते बाबूजी"  उसने कहा। "बाहर से कुछ भी आ सकता है।"

"क्या आ सकता है?" अभ्यंकर ने पूछा।

लड़की ने लालटेन थोड़ी धीमी कर दी।

"सारघा की हवेली वाले।"

अभ्यंकर को डर लगने लगा।

"कौन है हवेली में?"

"कोई नहीं।" लड़की ने कहा। "हवेली खाली है पर कहते हैं, वहाँ जो रहता था, वो अभी भी चाय पीने आता है।"

अभ्यंकर ने कुल्हड़ नीचे रख दिया। उसने आधी चाय पी ली थी अब उसे अजीब लग रहा था।

"तुम मुझे डरा रही हो?"

"नहीं बाबूजी" लड़की ने कहा "मैं तो बस बता रही हूँ आप शहर के हो ना? आप इन बातों पर विश्वास नहीं करोगे।"

तभी खिड़की पर जोर से कुछ टकराने की आवाज आई। ठक!

दोनों ने खिड़की की तरफ देखा कोई था। बारिश में कोई खड़ा था।

लड़की का चेहरा सफेद पड़ गया।

"आपने दरवाजा खटखटाया था ना?" उसने फुसफुसाते हुए कहा "अब वो भी खटखटा रहे हैं।"

खिड़की पर फिर आवाज आई  ठक ठक ठक।

बिल्कुल वैसे ही, जैसे अभ्यंकर ने दरवाजा खटखटाया था।

अभ्यंकर उठ खड़ा हुआ।

"कौन है बाहर?"

लड़की ने उसका हाथ पकड़ लिया उसका हाथ बहुत ठंडा था।

"मत खोलना बाबूजी मैं आपको नहीं जानती, पर इतना कह सकती हूँ - मत खोलना।"

बाहर बारिश में, खिड़की के उस पार, एक परछाई दिख रही थी। काली परछाई

और वो परछाई धीरे-धीरे दरवाजे की तरफ जा रही थी।

*खिड़की पर कौन था? क्या वो हवेली से आया था? और लड़की अभ्यंकर को क्यों रोक रही है जबकि वो उसे जानती भी नहीं?*

*जानने के लिए continue padhne ke liye *** follow 

---