प्रेम, रिश्ता, दोस्त, भावनाएं

by Rajan Singh in Hindi Poems

कभी कचौड़ी गली गुजरता, तो कहती रंगबाज है। अगर तुम्हारे काँधों पे सिर रखता पूछती क्या? राज है।। मेरे सीनें पर जो घूमें, अँगुली सी सहचर थी तुम। गाये थे जो नग़में मिलके, बैठी' साइकिल पर थी तुम।।(२) रोटी के पर्थन हाथों में, ...Read More