Dastane Ashq-17 by SABIRKHAN in Hindi Classic Stories PDF

दास्तान-ए-अश्क -17

by SABIRKHAN Matrubharti Verified in Hindi Classic Stories

कोई अपना सा होता जो मेरे मन को छुता.. कोई सपना सा था जो सारी रात न रुठा कहा से सिमट आई बरखा आंखो तले जमकर उसने मन के बोझ को है लूंटा 17 जैसे बरसों से बंजर ...Read More