Pitambari - 2 by Meena Pathak in Hindi Social Stories PDF

पीताम्बरी - 2

by Meena Pathak Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

जेठ की तपती दुपहरी की गर्म लू शरीर को झुलसा रही थी, सूरज अपने यौवन के चरम पर आग उगल वसुधा को दहका रहा था, सड़क पर इक्का-दुक्का लोग ही आते जाते दिख रहे थे बाकी कभी-कभी जीप फर्राटे ...Read More