Kabhi Socha n tha - 1 by महेश रौतेला in Hindi Poems PDF

कभी सोचा न था - १

by महेश रौतेला in Hindi Poems

कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,क्षीण आवाज में,सुब-शाम साउगता-अस्त होता,मन से गुनगुनाताक्षणिक विश्वास लिये।सच-झूठ को खींचतामनुष्य बनमौन हूँ।*******२.अपनी खिड़कीअपनी खिड़कीस्वयं ही ...Read More