Murde ki jaan khatre me - 1 by अनिल गर्ग in Hindi Detective stories PDF

मुर्दे की जान खतरे में - 1

by अनिल गर्ग in Hindi Detective stories

अशोक विहार की कोठी में जब मैंने कदम रखा तो उस समय बंसल साहब की लाश ड्राइंग रूम में बिलकुल बीचोंबीच पड़ी हुई थी। पुलिस की फोरेंसिक टीम अपने काम में लगी हुई थी और फोटोग्राफर लाश के विभिन्न ...Read More