Kuch Pankti by Narendra Rajput in Hindi Poems PDF

कुछ पंक्ति

by Narendra Rajput in Hindi Poems

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे बहोत चाहते है,अगर यह चाहत है तो हे ईश्वर,किसीको किसीसे ...Read More