Seeta - Ek naari - 2 by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems PDF

सीता: एक नारी - 2

by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems

सीता: एक नारी ॥द्वितीय सर्ग॥ मेरे लिए जो था प्रतीक्षित वह समय भी आ गयारण बीच रावण बन्धु-बांधव के सहित मारा गया कम्पित दिशाएँ हो उठीं जयघोष से अवधेश केविच्छिन्न हो भू पर पड़े थे शीश दस लंकेश के ...Read More