Zindagi ki Dhoop-chhanv - 3 by Harish Kumar Amit in Hindi Short Stories PDF

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 3

by Harish Kumar Amit Matrubharti Verified in Hindi Short Stories

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' रिश्तों का दर्द शाम के समय वह दफ़्तर से घर पहुँचा, तो उसे बहुत तेज़ भूख लगी हुई थी. उसने सोचा था कि घर पहुँचकर चाय पीने की बजाय वह पहले खाना खा ...Read More