Gavaksh - 27 by Pranava Bharti in Hindi Social Stories PDF

गवाक्ष - 27

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

गवाक्ष 27== यह निरीह कॉस्मॉस जहाँ भी जाता, वहीं से अपने भीतर एक नई संवेदना भरकर ले आता । भयभीत भी था किन्तु बेबस भी। उसकी बुद्धि में कुछ भी नहीं आ रहा था, वह क्या करे? मंत्री जी ...Read More