Gavaksh - 34 by Pranava Bharti in Hindi Social Stories PDF

गवाक्ष - 34

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

गवाक्ष 34== सत्याक्षरा को पीड़ा में छोड़कर कॉस्मॉस न जाने किस दिशा की ओर चलने लगा । उसके मन में अक्षरा की पीड़ा से अवसाद घिरने लगा था, एक गर्भवती स्त्री को कितना सताकर आया था वह ! उसके ...Read More