Gavaksh - 37 by Pranava Bharti in Hindi Social Stories PDF

गवाक्ष - 37

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

गवाक्ष 37== कॉस्मॉस के मन को सत्यनिधि की मधुर स्मृति नहला गई । कितना कुछ प्राप्त किया था उस नृत्यांगना से जो उसकी 'निधी'बन गया था। निधी ने भी तो यही कहा था – 'सीखने के लिए शिष्य का ...Read More