khiltey Patthar by Prabodh Kumar Govil in Hindi Short Stories PDF

खिलते पत्थर

by Prabodh Kumar Govil Matrubharti Verified in Hindi Short Stories

"खिलते पत्थर!" उन्हें इस अपार्टमेंट में आए ज़्यादा समय नहीं हुआ था। ज़्यादा समय कहां से होता। ये तो कॉलोनी ही नई थी। फ़िर ये इमारत तो और भी नई। शहर से कुछ दूर भी थी ये बस्ती। सब ...Read More