mai bharat bol raha hun - 10 by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" in Hindi Poems PDF

मैं भारत बोल रहा हूं -काव्य संकलन - 10

by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" in Hindi Poems

मैं भारत बोल रहा हूं (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 37. कवच कुण्डल विना व्याकरण ना पढ़ा, व्याख्या करते दिखा, शब्द-संसार को जिसने जाना नहीं। स्वर से व्यजंन बड़ा, या व्यजंन से स्वर, फिर भी हठखेलियाँ, बाज माना ...Read More