mai bharat bol raha hun - 14 by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" in Hindi Poems PDF

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 14

by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" in Hindi Poems

मैं भारत बोल रहा हूं14 (काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 56. सोच में गदहे.......... राजनीति से दुखित हो, गदहे करत विचार। सुसाइड करते पुरूष, हमरो नहीं यह कार्य।। ...Read More