Janjeevan - 1 by Rajesh Maheshwari in Hindi Poems PDF

जनजीवन - 1

by Rajesh Maheshwari Matrubharti Verified in Hindi Poems

हे राम! इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान, मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम। रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष, विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष। करें ...Read More