janjeevan - 4 by Rajesh Maheshwari in Hindi Poems PDF

जनजीवन - 4

by Rajesh Maheshwari Matrubharti Verified in Hindi Poems

अंत से प्रारंभ। माँ का स्नेह देता था स्वर्ग की अनुभूति, उसका आशीष भरता था जीवन में स्फूर्ति। एक दिन उसकी सांसों में हो रहा था सूर्यास्त हम थे स्तब्ध और विवके शून्य देख रहे थे जीवन का ...Read More