After you - 4 by Pranava Bharti in Hindi Poems PDF

तुम्हारे बाद - 4

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Poems

19 -------- न जाने कौन रोक देता है मुझको यूँ ही टोक देता है मुझे कुछ गुनाह करने से मेरे कदम नहीं बढ़ पाते हैं, थम जाते हैं और बेबस सी एक आह फिसल जाती है आसमान से ज़मीं ...Read More