mai bharat bol raha hun - 18 by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" in Hindi Poems PDF

मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 18

by बेदराम प्रजापति "मनमस्त" Matrubharti Verified in Hindi Poems

नींब के पत्‍थर-- सो रहे तुम, आज सुख से, दर्द उनको हो रहा है। शान्‍त क्रन्‍दन पर उन्‍हीं के, आसमां- भी रो रहा है।। यामिनी के मृदु प्रहर में, दर्द-सी, पीड़ा कहानी। सुन रहा है आज निर्जन, ...Read More