नि.र.स. - 4 - एहसास हमारा, जिक्र तुम्हारा

by Rajat Singhal in Hindi Poems

नि.र.स. - एहसास हमारा, जिक्र तुम्हारा ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Dedicate to my Pen ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- गर रिहाई हो इस प्यार से, तो कलम से लिख एहसास को, गर एहसास नि.र.स. हो जाए, तो नि.र.स. की स्याही ना हो।