Premchand (Review) by shivani singh in Hindi Book Reviews PDF

प्रेमचंद (समीक्षा)

by shivani singh in Hindi Book Reviews

"न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं वह जैसे चाहे नचाती है।"कोई भी साहित्यकार युगीन परिस्थितियों से निश्चित रूप से प्रभावित होता है ,लेकिन उसके व्यक्तिगत जीवन की घटनाएं भी उसके सहित्य पर अनजाने ...Read More