नवगीत - नए अनुबंध ( पांच नवगीत)

by Dr Jaya Shankar Shukla in Hindi Poems

१-नई पौधनई पौधकी बदचलनी को बरगद झेल रहे, ऊँची-नीची पगडंडी पर पाँव फिसलते हैं , एक-दूसरे से मिलजुल कर कब ये चलते हैं .गुस्से की अगुवाई मे कुछ ऐसे खेल रहे . नातों ...Read More


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