poem by Jitin Tyagi in Hindi Poems PDF

कविता

by Jitin Tyagi Matrubharti Verified in Hindi Poems

छुआ था। जब तुमने रूमानी होकर मुझे पहली बारसहम सी गई थी मैं, सिमट सी गई थी मैंछलक सी गई थी मैं, और एक जगह जड़ सी हो गई थी मैंवो अजीब सी छुअन, ना जाने कैसी छुअन थीपर ...Read More